Jantar Mantar Protest:फिर हिरासत में कॉकरोच जनता पार्टी के नेता, पुलिस ने सौरव दास- आशुतोष रांका को पकड़ा, SIR पर पटना तक पहुंची विरोध की आंच

Jantar Mantar Protest: कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर हिरासत में ले लिया...

पुलिस ने सौरव दास- आशुतोष रांका को पकड़ा, दिल्ली से पटना तक उबाल- फोटो : social Media

Jantar Mantar Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर  को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली से पटना तक विरोध प्रदर्शनों की गूंज सुनाई दे रही है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी  के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि दोनों नेता पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैरिकेड पार कर जंतर-मंतर की तरफ बढ़ रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई है, जब जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शन को लेकर सख्त पाबंदियां लागू हैं। प्रशासन के मुताबिक, भारतीय नागरिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत भारतीय न्याय संहिता नहीं, बल्कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के अंतर्गत निषेधाज्ञा लागू होने की स्थिति में सार्वजनिक जमावड़े और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। 

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की जगह बदली, तीन नए स्थल निर्धारित

प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने 12 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के जरिए जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में प्रतिबंधित करने का फैसला किया। प्रदर्शनकारियों के लिए बुराड़ी मैदान, रामलीला मैदान और सीबीडी ग्राउंड जैसे वैकल्पिक स्थल निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस सतर्क है।

SIR पर विपक्ष का हमला, चुनाव आयोग पर उठ रहे सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस, वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) और कॉकरोच जनता पार्टी समेत विभिन्न संगठनों के विरोध ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और स्थानीय अधिकारियों के अधिकारों को लेकर भी आपत्तियां जताई हैं। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का जवाब आधिकारिक तथ्यों और नियमों के आधार पर सामने आना बाकी है।

पटना में भी विरोध की आंच, छात्र-युवा संगठन मैदान में

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के बाद बिहार की राजधानी पटना में भी छात्र और युवा संगठनों की सक्रियता बढ़ने की खबर है। AISA और RYA के नेतृत्व में गांधी मैदान से मार्च और प्रदर्शन किए जाने की बात सामने आई है। माले विधायक संदीप सौरव समेत विपक्षी नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

विरोध प्रदर्शनों के जरिए विपक्ष मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की कोशिश कर रहा है। इससे बिहार की सियासत में भी इस मुद्दे पर बहस तेज होने के आसार हैं।

विरोध से निपटने के लिए BJP की रणनीति, संवाद और फैक्ट शीट पर जोर

इस सियासी घमासान के बीच भाजपा और एनडीए सरकार की रणनीति को लेकर भी चर्चाएं हैं। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, भाजपा प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं से संवाद करने तथा एसआईआर से जुड़े तथ्यों को सामने रखने की तैयारी में है।

पार्टी की ओर से तथ्य पत्रक यानी फैक्ट शीट के जरिए चुनाव आयोग की प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की रणनीति अपनाए जाने की बात कही जा रही है। संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को हटाने की प्रक्रिया भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी हुई है। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया महाभियोग के बजाय संसद में निर्धारित विशेष प्रक्रिया के तहत होती है।

फिलहाल, दिल्ली में हिरासत की कार्रवाई और पटना में विरोध की खबरों के बीच एसआईआर का विवाद और गहराता दिख रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव संवाद से सुलझता है या आने वाले दिनों में सड़कों पर सियासी संघर्ष और तेज होता है।

ब्यूरो रिपोर्ट