Mathura Krishna Janmabhoomi Dispute: मथुरा कृष्ण जन्मभूमि केस में नया पेच,किस मुकदमे को माना जाए मुख्य वाद? सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को दी गई थी चुनौती, अब 2 सितंबर पर टिकी निगाहें

Mathura Krishna Janmabhoomi Dispute:सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2025 के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें एक अन्य मुकदमे के हिंदू पक्षकार को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मानने की अनुमति दी गई थी।...

मथुरा कृष्ण जन्मभूमि केस में नया पेच- फोटो : social Media

Mathura Krishna Janmabhoomi Dispute:  मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम संकेत दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले में यह तय करने की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेज सकता है कि आखिर विवाद से जुड़े कई मुकदमों में से किसे मुख्य वाद के रूप में सुना जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की उस प्रक्रिया पर सवाल उठाया, जिसमें एक अलग मुकदमे में शामिल हिंदू पक्षकार को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मान लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस संबंध में दूसरे वादियों को नोटिस तक जारी नहीं किया था। पीठ ने टिप्पणी की कि हाईकोर्ट में दाखिल आवेदन का उद्देश्य कुछ और था और सभी पक्षकारों को नोटिस दिए बिना किसी एक वादी को सभी भक्तों का प्रतिनिधि मान लेना उचित प्रक्रिया नहीं हो सकती। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि वह मामले को दोबारा विचार के लिए हाईकोर्ट भेजने को इच्छुक है।

यह विवाद उस समय और पेचीदा हो गया, जब अलग-अलग हिंदू पक्षकारों की ओर से दाखिल मुकदमों में प्रतिनिधित्व को लेकर मतभेद सामने आए। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि हिंदू पक्षकारों के बीच अनौपचारिक बातचीत चल रही है कि विवाद में किस मुकदमे को मुख्य वाद माना जाए।कुछ हिंदू पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने भी मामले को दोबारा निर्णय के लिए हाईकोर्ट भेजने का आग्रह किया था।

सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2025 के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें एक अन्य मुकदमे के हिंदू पक्षकार को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मानने की अनुमति दी गई थी।

हाईकोर्ट ने 2023 के वाद संख्या 17 के वादी की अर्जी स्वीकार की थी। इसमें उसके मुकदमे को विवाद से जुड़े अन्य मुकदमों का प्रतिनिधि वाद मानने का अनुरोध किया गया था। इससे असंतुष्ट एक हिंदू पक्षकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और दावा किया कि सभी दीवानी मुकदमों को हाईकोर्ट में स्थानांतरित किए जाने के बाद उसके मुकदमे को मुख्य वाद माना गया था।इस मामले में मस्जिद समिति और विभिन्न हिंदू पक्षों की कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इनमें 26 मई 2023 के हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी शामिल हैं, जिसके तहत मथुरा की अदालतों में लंबित इस विवाद से जुड़े सभी मामलों को हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था।

मामला अब सिर्फ धार्मिक दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें यह महत्वपूर्ण कानूनी सवाल भी सामने आ गया है कि इतने मुकदमों में मुख्य वाद और प्रतिनिधि वादी किसे माना जाए। सुप्रीम कोर्ट के हाईकोर्ट को मामला वापस भेजने के संकेत के बाद अगली सुनवाई अहम मानी जा रही है।मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़े इस विवाद में हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने भगवान कृष्ण की जन्मस्थली पर बने मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद का निर्माण कराया था। वहीं, इस दावे को लेकर संबंधित मुस्लिम पक्ष की ओर से कानूनी प्रतिवाद किया जाता रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में यह साफ होने की उम्मीद है कि आगे की न्यायिक प्रक्रिया किस मुकदमे को केंद्र में रखकर आगे बढ़ेगी।