Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक ने जताई एनकाउंटर की आशंका, अमित शाह के इस्तीफे की मांग से गरमाया माहौल

Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी जान को खतरा होने का दावा किया है।...

सोनम वांगचुक ने जताई एनकाउंटर की आशंका- फोटो : social Media

Sonam Wangchuk:लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसक झड़प और पुलिस फायरिंग की बरसी पर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी जान को खतरा होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें चेतावनियां मिली हैं कि उन्हें मुठभेड़ में मारा जा सकता है। वांगचुक ने इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग भी उठाई और लद्दाख की घटनाओं की जिम्मेदारी तय करने की बात कही।

24 सितंबर को लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की पहली बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में वांगचुक ने कहा कि उन्हें जेल में डालने के बाद अब उन्हें एनकाउंटर का डर दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी जान जाने से देश जागता है और लद्दाख के मुद्दे पर लोगों का ध्यान जाता है तो वे किसी भी अंजाम का सामना करने को तैयार हैं। यह उनका व्यक्तिगत दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्टों में नहीं हुई है।

वांगचुक ने पिछले वर्ष की हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने चेताया कि यदि रिपोर्ट सामने नहीं लाई गई तो पुलिस फायरिंग की जांच के लिए स्वतंत्र ‘जन न्यायाधिकरण’ गठित करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। पिछले वर्ष 24 सितंबर को लेह में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़कने के बाद पुलिस फायरिंग में चार नागरिकों की मौत हुई थी और 44 लोग घायल हुए थे।

सभा को संबोधित करते हुए वांगचुक ने सीधे तौर पर अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख में सुरक्षाबलों ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया। इन आरोपों को वांगचुक के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए; उपलब्ध रिपोर्ट में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

वांगचुक ने लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों और छठी अनुसूची की मांग को आंदोलन की बुनियाद बताया। उनका कहना है कि केंद्र की ओर से कथित तौर पर पहले किए गए आश्वासनों से पीछे हटने के कारण आंदोलन लंबा खिंचा। दूसरी ओर, केंद्र ने सितंबर में लद्दाख के लिए अतिरिक्त संवैधानिक संरक्षण के तौर पर अनुच्छेद 371(K) का प्रस्ताव रखा है, हालांकि प्रतिनिधियों के मुताबिक इसके मसौदे और अधिकारों पर बातचीत अभी बाकी है।

इस बीच वांगचुक ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हथियारों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे और अमित शाह के इस्तीफे की मांग की थी। लद्दाख को लेकर वांगचुक के ताजा बयान के बाद आंदोलन और केंद्र के बीच टकराव का सुर फिर तेज होता दिख रहा है।पिछले साल की घटना के बाद वांगचुक पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था और वे करीब छह महीने जोधपुर जेल में रहे थे। हालिया घटनाक्रम में लद्दाख के उपराज्यपाल ने पिछले सप्ताह उस घटना के बाद दर्ज 87 मामलों में से 20 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामलों को वापस लेने की घोषणा की है।