Bihar Health News: सदर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था! महिला मरीज को बेड नहीं मिला, बैठने की जगह पर चढ़ाया स्लाइन

Bihar Health News: मॉडल सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज कराने पहुंची एक महिला मरीज को बेड नहीं मिलने के कारण बैठने की जगह पर ही स्लाइन चढ़ाए जाने का आरोप लगा है।

सदर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था! - फोटो : reporter

Bihar Health News: आरा सदर अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। मॉडल सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज कराने पहुंची एक महिला मरीज को बेड नहीं मिलने के कारण बैठने की जगह पर ही स्लाइन चढ़ाए जाने का आरोप लगा है। इस दौरान मरीज की बहू हाथ में आरएल (रिंगर लैक्टेट) की बोतल लेकर खड़ी रही। घटना की तस्वीर सामने आने के बाद अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

मरीज की पहचान धरहरा बाइपास निवासी शिवरातो देवी के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, उनके पति और बहू तबीयत खराब होने पर उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां चिकित्सकों ने उन्हें स्लाइन चढ़ाने की सलाह दी। इसके बाद इमरजेंसी वार्ड में उनका इलाज शुरू किया गया। लेकिन परिजनों का आरोप है कि वार्ड में बेड खाली नहीं होने की बात कहकर उन्हें बिस्तर उपलब्ध नहीं कराया गया।

बेड नहीं मिलने पर बैठने की जगह पर चढ़ाया स्लाइन

परिजनों के अनुसार, महिला मरीज को बेड पर भर्ती करने के बजाय वार्ड में बैठने वाली जगह पर ही स्लाइन चढ़ाया गया। इस दौरान उनकी बहू को आरएल की बोतल हाथ में लेकर खड़े रहना पड़ा। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इस तरह इलाज किए जाने की तस्वीर ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।आमतौर पर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को उनकी हालत के मुताबिक तत्काल चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाती है। ऐसे में इलाज के लिए पहुंची महिला को बेड नहीं मिलने और बैठने की जगह पर स्लाइन चढ़ाए जाने का मामला सामने आने से अस्पताल की तैयारियों और उपलब्ध संसाधनों पर चर्चा शुरू हो गई है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

आरा सदर अस्पताल भोजपुर जिले के प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्रों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इमरजेंसी वार्ड में बेड की उपलब्धता और मरीजों की देखभाल की व्यवस्था बेहद अहम हो जाती है। यदि वार्ड में बेड की कमी के कारण मरीजों को वैकल्पिक जगह पर इलाज कराना पड़ रहा है, तो यह अस्पताल प्रबंधन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।हालांकि, इस घटना के संबंध में अस्पताल प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में बेड की वास्तविक उपलब्धता, उस समय वार्ड में मरीजों की संख्या और महिला को उसी जगह इलाज देने की परिस्थितियों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

अस्पताल प्रबंधन के जवाब का इंतजार

अब सवाल यह है कि इमरजेंसी वार्ड में बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रबंधन क्या कदम उठाता है। साथ ही, मरीजों को सम्मानजनक और सुविधाजनक तरीके से इलाज उपलब्ध कराने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है, इस पर भी लोगों की निगाहें टिकी हैं। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, शिवरातो देवी के इलाज से जुड़ा यह मामला सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं और मरीजों की देखभाल को लेकर एक बार फिर बहस का विषय बन गया है।

रिपोर्ट- आशीष कुमार