Bihar News:ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़कों पर संग्राम, दिल्ली से बिहार तक ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर गरजा विपक्ष

Bihar News:राजधानी दिल्ली के आकाशवाणी भवन से शुरू हुई वह रात, अब पूरे देश में फैल चुकी है।

:ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़कों पर संग्राम- फोटो : reporter

Bihar News:राजधानी दिल्ली के आकाशवाणी भवन से शुरू हुई वह रात, अब पूरे देश में फैल चुकी है। मंगलवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत करीब 300 विपक्षी सांसदों ने जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर निर्वाचन आयोग तक मार्च निकाला था, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। नौ घंटे का धरना, नारेबाजी और अंत में हिरासत यह सब सिर्फ शुरुआत साबित हो रहा है।

आज बुधवार को यह आक्रोश नए रूप में सामने आया। बिहार में महागठबंधन ने ‘आक्रोश मार्च’ निकाल दिया। तेजस्वी यादव के आह्वान पर राज्य के हर प्रखंड में राजद, कांग्रेस और सहयोगी दल सड़कों पर उतरे। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर नारे गूंज रहे हैं “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो”। कल यानी 8 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर धरना और पटना में लोकभवन मार्च का प्लान है।

दिल्ली में भी मोर्चा नया रूप ले चुका है। मंगलवार को INDIA ब्लॉक के बड़े मार्च से दूर रही आम आदमी पार्टी आज कांग्रेस और वाम दलों के साथ कश्मीरी गेट स्थित दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रही है। दोपहर एक बजे शुरू हुए इस मार्च में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आवाज बुलंद की जा रही है। अरविंद केजरीवाल पहले ही ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। जंतर-मंतर इलाके में धारा 163 लागू कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आज इंडिया गठबंधन के सांसदों को लंच पर बुलाया है। रणनीति बैठक में आगे की रूपरेखा तय हो रही है। पार्टी ने पहले ही ब्लॉक और जिला स्तर पर 10 से 20 अक्टूबर तक प्रदर्शनों का ऐलान कर रखा है। ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान नवंबर तक चलेगा।

 तो वहीं भोजपुर के बड़हरा प्रखंड मुख्यालय पर राजद नेत्री सोनाली सिंह के नेतृत्व में चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान राजद कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

यह विवाद SIR प्रक्रिया से जुड़ा है। विपक्ष का आरोप है कि करोड़ों नाम मतदाता सूची से गायब हो गए, फॉर्म-6 में बदलाव किए गए और चुनाव आयोग के अंदर भी असहमति की खबरें आईं। ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या आयोग निष्पक्ष रह पाया। भाजपा इसे हारे हुए दलों की निराशा बता रही है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

इस पूरे विवाद की जड़ SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के आरोप हैं। विपक्ष का दावा है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम प्रभावित हुए हैं और फॉर्म-6 से जुड़े बदलावों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। दूसरी ओर भाजपा इन आरोपों को चुनावी हार की निराशा बता रही है। चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।अब यह टकराव महज एक चुनावी विवाद नहीं रह गया है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और मतदाता अधिकारों से जोड़कर बड़ा आंदोलन बनाने की कोशिश में जुटा है।

रिपोर्ट- आशीष कुमार