गोह और नबीनगर चुनाव परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती, कड़े पहरे में सुरक्षित की गईं EVM-VVPAT मशीनें

औरंगाबाद के गोह और नबीनगर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणामों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसके बाद प्रशासन ने चुनाव में प्रयुक्त EVM-VVPAT मशीनों को विशेष सुरक्षा में सुरक्षित कर दिया है।

Aurangabad -  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद औरंगाबाद जिले में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। जिले की दो विधानसभा सीटों— गोह और नबीनगर के घोषित परिणामों को प्रत्याशियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस कानूनी वाद के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है और चुनाव आयोग के निर्देश पर साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की कवायद तेज कर दी गई है। 

मात्र 112 वोटों का अंतर और प्रशासन पर आरोप


हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले प्रत्याशियों में नबीनगर से राजद प्रत्याशी अमोद चंद्रवंशी शामिल हैं, जो अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जदयू के चेतन आनंद से महज 112 वोटों के मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे। वहीं, गोह विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रहे रणविजय सिंह ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए निर्वाचन याचिका दायर की है। दोनों ही प्रत्याशियों का मानना है कि मतगणना और प्रशासनिक प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई है। 

वेयर हाउस में मशीनों का पृथक्करण (Segregation)

कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम अभिलाष शर्मा ने ईवीएम (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) मशीनों को सुरक्षित करने का आदेश दिया। प्रखंड परिसर स्थित ईवीएम गोदाम को निर्धारित प्रक्रिया के तहत खोला गया। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में इस्तेमाल की गई सभी मशीनों को अन्य मशीनों से अलग कर (Segregation) विशेष सुरक्षा में 'बज्र गृह' में रखा गया है। 

पारदर्शिता के लिए राजनीतिक दलों की मौजूदगी


मशीनों को अलग करने और वेयर हाउस खोलने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। इस दौरान नबीनगर के निर्वाची पदाधिकारी श्वेतांक लाल, उप निर्वाचन पदाधिकारी मोहम्मद गजाली और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। उपस्थित प्रतिनिधियों में गुड्डू सिंह (जदयू), जयप्रकाश कुमार (जदयू), अमोद कुमार सिंह और शशि सिंह समेत कई नेता शामिल थे, जिनकी मौजूदगी में मशीनों की पहचान और मिलान किया गया। 

न्यायालय के आदेश का इंतजार

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग के निर्देशानुसार सभी साक्ष्यों को पूरी पारदर्शिता के साथ सुरक्षित रखा गया है। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। मशीनों को तब तक कड़ी सुरक्षा में रखा जाएगा जब तक कि न्यायालय द्वारा साक्ष्यों की जांच या पुनः मतगणना से संबंधित कोई स्पष्ट आदेश नहीं आ जाता।