Bihar News : ईंधन बचत की अनूठी पहल, साइकिल से कोर्ट पहुंचे बाँका जिला जज, 'राष्ट्र प्रथम' का दिया संदेश
Bihar News : बाँका जिला न्यायिक क्षेत्र में एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्यभूषण आर्य स्वयं साइकिल चलाकर न्यायालय पहुंचे.......पढ़िए आगे
BANKA : वैश्विक स्तर पर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने दुनिया भर में आर्थिक संकट और तेल-गैस की किल्लत की आशंका बढ़ा दी है। इस संभावित संकट के बीच देश में ईंधन संरक्षण को लेकर जागरूकता तेज हो गई है। इसी दिशा में गुरुवार को बाँका जिला न्यायिक क्षेत्र में एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर देखने को मिली, जहाँ जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्यभूषण आर्य स्वयं साइकिल चलाकर न्यायालय पहुँचे।
न्यायिक अधिकारियों ने भी किया नेतृत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में डीजल-पेट्रोल की बचत और संसाधनों के सीमित उपयोग की अपील के बाद, जिला जज सत्यभूषण आर्य ने इस अभियान का नेतृत्व संभाला। उनके इस कदम से प्रभावित होकर जिला न्यायालय के कई अन्य न्यायिक पदाधिकारी भी अपने सरकारी आवास से साइकिल चलाकर ही कोर्ट पहुँचे। इस पहल ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में, बल्कि आम जनता के बीच भी गहरी छाप छोड़ी है।
'राष्ट्र प्रथम' की भावना पर जोर
इस अवसर पर जिला जज सत्यभूषण आर्य ने कहा कि वर्तमान में जिस तरह के वैश्विक हालात बन रहे हैं, उसे देखते हुए हर नागरिक को "राष्ट्र प्रथम" की भावना के साथ अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छोटी-छोटी बचत ही देश को बड़े आर्थिक संकटों से बचाने में सहायक सिद्ध होती है। उन्होंने आम जनता से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में अनावश्यक ईंधन की खपत को कम करें।
वैकल्पिक साधनों को अपनाने की अपील
जिला जज ने लोगों से अपील की कि वे डीजल-पेट्रोल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए साइकिल जैसे वैकल्पिक साधनों का उपयोग बढ़ाएं। उन्होंने न केवल ईंधन की बचत, बल्कि खाद्य तेल के सीमित उपयोग और अनावश्यक सोने की खरीदारी से बचने जैसे आर्थिक सुधारों पर भी बल दिया। उनके अनुसार, यह बचत न केवल व्यक्तिगत बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी सुरक्षा कवच का काम करेगी।
जनता ने की पहल की सराहना
न्यायिक अधिकारियों की इस सादगी और कर्तव्यनिष्ठा को स्थानीय लोगों ने खूब सराहा। बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब समाज के शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्ति इस तरह का उदाहरण पेश करते हैं, तो उसका प्रभाव दूरगामी होता है। इसे पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय हित की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक संदेश माना जा रहा है।
चंद्रशेखर भगत की रिपोर्ट