Bihar News: मरे हुए अब्बा की घर वापसी से मचा कोहराम, कब्र में दफन था किसी और का शव, 24 घंटे बाद खुला पहचान का सनसनीखेज खेल

Bihar News:एक व्यक्ति को मृत समझकर परिवार ने पूरे गम और मातम के माहौल में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया, लेकिन दफनाने के महज 24 घंटे बाद वही शख्स जिंदा अपने घर लौट आया।...

मरे हुए अब्बा की घर वापसी से मचा कोहराम- फोटो : reporter

Bihar News:बिहार के बांका जिले से एक ऐसा हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस, प्रशासन और आम लोगों को सकते में डाल दिया है। यहां एक व्यक्ति को मृत समझकर परिवार ने पूरे गम और मातम के माहौल में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया, लेकिन दफनाने के महज 24 घंटे बाद वही शख्स जिंदा अपने घर लौट आया। इसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।

घटना धोरैया थाना क्षेत्र के भगवानपुर गांव से जुड़ी है। मामला तब शुरू हुआ जब रजौन पुलिस को एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला। शव की पहचान नहीं होने पर उसकी तस्वीर सोशल मीडिया और विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में प्रसारित की गई। वायरल तस्वीर देखने के बाद भगवानपुर निवासी मुजाहिद अंसारी ने दावा किया कि शव उनके कई दिनों से लापता पिता सगीर अंसारी का है।परिवार पहले से अपने लापता मुखिया को लेकर परेशान था। तस्वीर देखकर सभी को यकीन हो गया कि सगीर अंसारी की मौत हो चुकी है। पुलिस ने भी पहचान के आधार पर शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद गांव में मातम छा गया। रिश्तेदार और ग्रामीण अंतिम दीदार के लिए जुटे और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार शव को कुरमा कब्रिस्तान में दफना दिया गया।

लेकिन कहानी में असली मोड़ अगले दिन आया। बुधवार सुबह जब सगीर अंसारी खुद अपने घर पहुंचे तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिन्हें मृत मानकर दफना दिया गया था, वे पूरी तरह जीवित सामने खड़े थे। पहले तो किसी को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन धीरे-धीरे सच्चाई सामने आने लगी। खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और सैकड़ों लोग ‘कब्र से लौटे शख्स’ को देखने उनके घर पहुंच गए।जांच में पता चला कि सगीर अंसारी मानसिक रूप से कमजोर हैं और अक्सर बिना बताए घर से निकल जाते हैं। इसी वजह से परिजनों ने जल्दबाजी में वायरल तस्वीर को देखकर पहचान कर ली थी। इसी बीच सन्हौला थाना क्षेत्र के गोविंदपुर गांव के एक युवक ने पुलिस से संपर्क कर दावा किया कि वायरल तस्वीर में दिख रहा शव उसके पिता रामकिशन मोहली का है।

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। अधिकारियों की मौजूदगी में कब्रिस्तान पहुंचकर दफन शव को बाहर निकाला गया। दोबारा पहचान और जांच के बाद स्पष्ट हो गया कि शव वास्तव में रामकिशन मोहली का ही था। इसके बाद शव को उनके परिजनों को सौंप दिया गया, जो उसे अपने गांव ले गए और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी।इस पूरे घटनाक्रम ने शव पहचान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल एक तस्वीर और मौखिक दावे के आधार पर शव सौंपना बड़ी लापरवाही है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि प्रशासनिक निगरानी में सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं, लेकिन यह मामला लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा कि आखिर एक गलत पहचान ने कैसे एक परिवार को मातम में डुबो दिया, जबकि असली मृतक का शव किसी और की कब्र में दफन हो गया।

रिपोर्ट- चंद्रशेखर भगत