"CM-DM कोई भी कह दे, बिना पैसे काम नहीं होगा!" बिहार के इस अंचल कार्यालय में खुलेआम चल रहा है 'खेला'
बेगूसराय अंचल कार्यालय से सामने आया भ्रष्टाचार का हैरान करने वाला मामला, पीड़ित ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार।अमीन की क्लीन चिट के बाद भी जमीन को डाला 'रोक सूची' में, जानिए बेगूसराय का पूरा घूसकांड
बिहार में नीतीश सरकार के "जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट करप्शन" के दावों को ठेंगा दिखाते हुए बेगूसराय जिले के खोदावंदपुर अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मूल रूप से बेगूसराय के नूरुल्लाहपुर के निवासी ललन कुमार ने मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को ईमेल भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि उनकी वैध खरीदी गई जमीन का दाखिल-खारिज करने के एवज में वर्तमान अंचलाधिकारी (CO) प्रीति कुमारी और उनके सहयोगी कंप्यूटर ऑपरेटर रणजीत कुमार द्वारा स्थानीय माध्यमों से ₹80,000 की मोटी रिश्वत मांगी गई। जब पीड़ित ने यह घूस देने से साफ इनकार कर दिया, तो उनके वैध आवेदन (संख्या 993/2025-2026) को बीती 13 मई 2026 को जानबूझकर खारिज (Reject) कर दिया गया।
जांच रिपोर्ट पॉजिटिव होने के बाद भी जमीन को डाल दिया 'रोक सूची' में
यह पूरा मामला प्रशासनिक संरक्षण और पद के दुरुपयोग की पराकाष्ठा को दर्शाता है। पीड़ित ललन कुमार ने साल 2012 में मौजा-दौलतपुर में विधिवत रूप से 14 कट्ठा भूमि खरीदी थी, जिस पर उनका मकान और दुकान भी निर्मित है। हैरानी की बात यह है कि इसी खाता-खेसरा से अन्य 10 लोगों ने भी जमीन खरीदी थी, जिनका दाखिल-खारिज वर्षों पहले हो चुका है। लेकिन पीड़ित के मामले को अंचल कार्यालय द्वारा जानबूझकर "ROK सूची" में डाल दिया गया, जिससे उनका विवरण ऑनलाइन पोर्टल से गायब हो गया। लंबी जद्दोजहद के बाद जब फरवरी 2026 में ऑनलाइन आवेदन हुआ, तो अमीन और संबंधित कर्मचारियों की स्थल जांच रिपोर्ट पूरी तरह सकारात्मक (Positive) आई। इसके बावजूद, सिर्फ रिश्वत की रकम न मिलने के कारण अंचल कार्यालय ने पूरी जांच को दरकिनार कर दिया।
"चाहे CM से कहवा दीजिए, बिना पैसे के काम नहीं होगा"— भ्रष्ट तंत्र की खुली चुनौती
शिकायती पत्र में अंचल कार्यालय के भीतर फैले बेखौफ भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाली एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। पीड़ित को कार्यालय की तरफ से स्पष्ट शब्दों में धमकी देते हुए कहा गया, "चाहे आप DM, Secretary, Minister या मुख्यमंत्री से कहवा दीजिए, जब तक पैसा नहीं देंगे तब तक काम नहीं होगा, क्योंकि हमें भी ऊपर तक पैसा देना पड़ता है।" यह बयान साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर भ्रष्ट अधिकारियों को कितना बड़ा प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। पीड़ित पिछले कई महीनों से (सितंबर 2025 से लेकर अब तक) बेगूसराय के जिलाधिकारी (DM) और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के एसीएस (ACS) को लगातार 5 बार शिकायती ईमेल भेज चुके हैं, लेकिन बार-बार फॉलो-अप के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
CO और उनके पति पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस मामले में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब वर्तमान अंचलाधिकारी प्रीति कुमारी के पति उमाशंकर यादव के भी राजस्व विभाग में ही सीओ (CO) के पद पर तैनात होने की बात सामने आई है। उनके खिलाफ भी कई गंभीर विभागीय मामले और जांच लंबित बताई जा रही है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निगरानी (विजिलेंस) या किसी स्वतंत्र विशेष जांच टीम (SIT) से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, रिश्वत मांगने वाली अंचलाधिकारी और कंप्यूटर ऑपरेटर को तत्काल निलंबित किया जाए। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे गंभीर मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो बिहार की भूमि और राजस्व व्यवस्था में व्याप्त इस गहरे भ्रष्टाचार से आम जनता का शासन प्रणाली से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।