ओवरलोड के नाम पर ₹40,000 की लूट! : ट्रक ड्राइवर ने खोला मोर्चा, DTO से की लिखित शिकायत, सौपे सुबूत
झारखंड के दुमका निवासी ट्रक चालक सुनील कुमार भगत ने ESI-6 मनोज कुमार और उनके कर्मियों पर ₹40,000 (₹28,000 PhonePe और ₹12,000 नगद) की अवैध वसूली का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पीड़ित ने डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रूफ के साथ DTO को लिखित शिकायत सौंपही है।
बिहार परिवहन विभाग के रखवाले ही जब कानून की धज्जियां उड़ाने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है. बेगूसराय से भ्रष्टाचार का एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां झारखंड के दुमका निवासी एक ट्रक चालक ने जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) को लिखित शिकायत सौंपी है. चालक ने ESI-6 बेगूसराय, मनोज कुमार और उनके साथी कर्मियों पर ₹40,000 की अवैध वसूली करने का सीधा और गंभीर आरोप लगाया है. इस लिखित शिकायत के बाद से पूरे परिवहन महकमे में हड़कंप मच गया है.
ओवरलोड के नाम पर डिजिटल और नगद वसूली का खेल
दरअसल यह पूरा मामला 14 मई 2026 की दोपहर करीब 3:00 बजे का है, जब गाड़ी संख्या JH 04 AF 6420 को लेकर चालक सुनील कुमार भगत बेगूसराय से गुजर रहे थे. शिकायत के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात ESI-6 मनोज कुमार (जिनके बैच पर नाम लिखा था) और उनके साथ मौजूद ड्राइवर व अन्य कर्मियों ने गाड़ी को ओवरलोड बताकर जबरन रोक लिया . इसके बाद मामले को रफा-दफा करने के नाम पर ₹40,000 की डिमांड की गई. शातिर तरीके से कार्रवाई से बचने के लिए ₹28,000 एक पेट्रोल पंप पर 'PhonePe' के जरिए डिजिटल ट्रांसफर करवाए गए, जबकि बाकी के ₹12,000 नगद रूप से कर्मियों ने अपनी जेब में रख लिए.
पुख्ता सबूतों के साथ न्याय की गुहार
पीड़ित ट्रक चालक सुनील कुमार भगत ने केवल आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि दिनांक 26 मई 2026 को जिला परिवहन पदाधिकारी को दी गई अपनी लिखित शिकायत के साथ पुख्ता सबूत भी पेश किए हैं. सुनील कुमार भगत ने पैसे ट्रांसफर का पूरा ट्रांजैक्शन विवरण (डिजिटल प्रूफ) और अन्य संबंधित दस्तावेज भी आवेदन के साथ संलग्न किए हैं. पीड़ित ने DTO से इस पूरे मामले का त्वरित संज्ञान लेते हुए दोषी अधिकारी और उनके सांठगांठ वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है.
रक्षक ही भक्षक: प्रशासनिक साख पर बड़ा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने बेगूसराय जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सड़कों पर सुरक्षा और नियमों का पालन कराने के लिए तैनात प्रवर्तन कर्मी (ESI) ही अगर इस तरह खुलेआम अवैध वसूली के खेल में लिप्त होंगे, तो सुदूर राज्यों से आने वाले आम चालकों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है. पुख्ता सबूतों के सामने आने के बाद अब जनता और पीड़ित चालक की निगाहें जिला प्रशासन के रुख पर टिकी हैं कि इस भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या और कितनी जल्द कार्रवाई की जाती है.
धीरज पाराशर की रिपोर्ट