Nepal Flood: नेपाल में कुदरत का कहर, भोटेकोशी की बाढ़ में 160 मौतें, 133 भारतीय समेत हजार से ज्यादा लापता, अलर्ट पर बिहार

Nepal Flood: नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। …....

कुदरत का कहर- फोटो : reporter

Nepal Flood:  नेपाल में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। बाढ़ की तेज धार ने देखते ही देखते मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 157 लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।बाढ़ इतनी भयावह थी कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पानी की तेज धार अपने साथ घर, वाहन, पुल और दूसरी अहम संरचनाएं बहा ले गई। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

अचानक आई बाढ़ का असर नेपाल के तीन जिलों में व्यापक रूप से देखने को मिला। कई बस्तियां जलप्रवाह में डूब गईं और महत्वपूर्ण पुलों के बह जाने से कई इलाकों का संपर्क दूसरे क्षेत्रों से कट गया।बाढ़ के कारण करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। बिजली उत्पादन और दूसरी जरूरी सेवाओं पर इसका असर पड़ा है। कई स्थानों पर मलबा जमा होने के कारण राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।यह आपदा हाल के वर्षों में नेपाल में आई सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक बताई जा रही है।

जानकारों के मुताबिक अचानक आई इस बाढ़ के पीछे ग्लेशियर से हुआ हिमस्खलन या बड़े पैमाने पर बर्फ और मलबे के नदी में गिरने की आशंका जताई जा रही है।अगर नदी के ऊपरी हिस्से में अचानक बर्फ, चट्टान और मलबा गिरने से पानी का रास्ता बाधित हुआ हो, तो इससे अस्थायी प्राकृतिक बांध बनने की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे बांध के टूटने पर नीचे की ओर बेहद तेज रफ्तार से पानी का सैलाब आ सकता है।हालांकि आपदा के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच और वैज्ञानिक आकलन के बाद ही हो सकेगी।

बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। रिपोर्टों में करीब 400 लोगों के लापता होने की बात कही गई है। लापता लोगों में विदेशी नागरिकों के साथ सुरक्षाकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं।कुछ अन्य रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या 1000 से अधिक होने की आशंका जताई गई है। इनमें 133 भारतीय नागरिकों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। अलग-अलग प्रारंभिक आंकड़ों के कारण लापता लोगों की वास्तविक संख्या राहत एवं बचाव अभियान के आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होने की उम्मीद है।

नेपाल में आई इस तबाही के बाद पश्चिम बंगाल के कई लोगों के संपर्क में नहीं होने की खबर है। इनमें कोलकाता का 32 सदस्यीय समूह भी शामिल बताया जा रहा है।एक अधिकारी के मुताबिक 30 पर्यटकों और दो टूर मैनेजरों वाला यह समूह कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था। बाढ़ के बाद समूह के सदस्यों से संपर्क नहीं हो पाने को लेकर परिजनों की चिंता बढ़ गई है।प्रशासन और संबंधित एजेंसियां लापता लोगों की जानकारी जुटाने और उनकी सुरक्षित लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।

नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बीच भारत ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत की ओर से 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी गई है।राहत सामग्री में आपदा से प्रभावित लोगों के लिए जरूरी सामान और सहायता सामग्री शामिल है। भारत की ओर से नेपाल को हरसंभव सहयोग देने की बात कही गई है।

नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। सुरक्षाबलों, स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों की टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं।बाढ़ से संपर्क मार्ग और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण कई इलाकों में राहत पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित परिवारों तक जरूरी खाद्य सामग्री और दूसरी राहत सामग्री पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।भोटेकोशी की उफनती धारा ने नेपाल में भारी तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को तलाशना और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना है।

रिपोर्ट- आशीष कुमार