वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघिन की संदिग्ध मौत, रेस्क्यू से पहले ही तोड़ा दम

Bettiah News In Hindi: बिहार के बेतिया के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में डेढ़ साल की एक बाघिन मृत अवस्था में बरामद की गई है. वन विभाग ने बाघिन के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघिन की संदिग्ध मौत- फोटो : news 4 nation

बिहार के बेतिया स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब मंगूरहा वनक्षेत्र के अंतर्गत पंडई नदी के किनारे एक बाघिन का शव बरामद हुआ। मृत बाघिन की उम्र लगभग डेढ़ साल बताई जा रही है। बुधवार (19 मार्च) को शव मिलने की सूचना मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और टीम मौके पर पहुंची। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

दो दिनों से जारी थी तलाश, रेस्क्यू से पहले हुई मौत

हैरानी की बात यह है कि वन विभाग की टीम पिछले दो दिनों से इस नन्ही बाघिन की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। विभाग को बाघिन की हलचल असामान्य लग रही थी, जिसके कारण उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की योजना बनाई जा रही थी। हालांकि, इससे पहले कि टीम उसे बचा पाती या उपचार दे पाती, बाघिन ने दम तोड़ दिया। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या बाघिन पहले से बीमार थी या उसकी मौत के पीछे कोई अन्य बाहरी कारण है।

संदिग्ध परिस्थितियां और पोस्टमार्टम की कार्रवाई

बाघिन की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है। वन विभाग ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का मानना है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों, जैसे कि आंतरिक चोट, बीमारी या किसी आपसी संघर्ष का पता चल सकेगा। फिलहाल, घटनास्थल के आस-पास के साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया गया है ताकि जांच में मदद मिल सके।

उच्च स्तरीय जांच: अधिकारियों की पैनी नजर

सीएफ (कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट) गौरव ओझा ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विशेषज्ञों की एक विशेष टीम मामले की गहन जांच में जुट गई है। वन विभाग इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है और किसी भी प्रकार की मानवीय चूक या शिकार जैसी संभावनाओं को भी ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। फिलहाल, पूरी टीम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत की गुत्थी सुलझ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जा सकें।