Bihar News : भागलपुर में वन विभाग ने की बड़ी कार्रवाई, विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन आश्रयणी क्षेत्र से 50 किलोग्राम प्रतिबंधित महाजाल किया जब्त

Bihar News :विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन आश्रयणी क्षेत्र में गंगा नदी के भीतर लगाए गए प्रतिबंधित महाजाल से जलीय जीवों और संरक्षित गांगेय डॉल्फिन के जीवन पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए वन विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की है।

वन विभाग की कार्रवाई - फोटो : BALMUKUND

BHAGALPUR : विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन आश्रयणी क्षेत्र में गंगा के भीतर लगाए गए प्रतिबंधित महाजाल से डॉल्फिन के जीवन पर खतरा मंडरा रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद भागलपुर वन प्रमंडल की टीम ने गोपालपुर प्रखंड के बुद्धूचक में स्पर संख्या-6 N के सामने गंगा से करीब 50 किलोग्राम प्रतिबंधित जाल जब्त किया है। आशंका जताई जा रही है कि इस तरह के जाल में फंसने से संरक्षित गांगेय डॉल्फिन की जान जा सकती है। वन विभाग ने आश्रयणी क्षेत्र में प्रतिबंधित जाल के इस्तेमाल पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही है।

गुप्त सूचना पर हरकत में आए वन प्रमंडल पदाधिकारी

वन प्रमंडल पदाधिकारी आशुतोष राज को 10 अक्टूबर 2026 को गुप्त सूचना मिली कि विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन आश्रयणी क्षेत्र में बुद्धूचक के पास स्पर संख्या-6 N के विपरीत दिशा में गंगा के भीतर अज्ञात मछुआरों ने महाजाल लगा रखा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने नवगछिया के वन क्षेत्र पदाधिकारी गौतम कुमार को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद वन विभाग के कर्मियों को स्थल निरीक्षण के लिए भेजा गया। जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान कर्मियों ने मौके की तस्वीरें लीं और अगले दिन पूरी टीम के साथ पहुंचकर कार्रवाई करने की बात कही। जब अगले दिन टीम दोबारा मौके पर पहुंची, तो गंगा के दूसरे किनारे तक जाने और जाल निकालने के लिए नाव की आवश्यकता पड़ी। स्थानीय स्तर पर नाव और कर्मियों की व्यवस्था करने की तैयारी की गई, लेकिन गंगा पार जाने को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आईं।

सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत

मामले में वन क्षेत्र पदाधिकारी गौतम कुमार से बातचीत के दौरान सुरक्षा के दृष्टिकोण से वरीय अधिकारियों के माध्यम से नवगछिया एसपी को आवेदन देकर अतिरिक्त पुलिस बल की मांग करने के बाद छापेमारी करने की बात सामने आई। इसके बाद वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप से गोपालपुर पुलिस का सहयोग मिला और वन विभाग की टीम ने प्रतिबंधित महाजाल को जब्त कर लिया। वन विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वन क्षेत्र पदाधिकारी नवगछिया कुमार गौतम के नेतृत्व में वन परिसर पदाधिकारी बिहपुर विजय कुमार सिंह ने गोपालपुर थाना पुलिस के सहयोग से जब्ती टीम गठित की। टीम ने बुद्धूचक में स्पर संख्या-6 N के सामने गंगा में लगाए गए लगभग 50 किलोग्राम प्रतिबंधित जाल को जब्त किया।

डॉल्फिन के लिए जानलेवा साबित हो सकता है महाजाल

विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन आश्रयणी क्षेत्र में प्रतिबंधित जाल का इस्तेमाल जलीय जीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। महाजाल में डॉल्फिन के फंसने से उसके घायल होने, सांस लेने में परेशानी होने और दम घुटने से मौत तक की आशंका रहती है। ऐसे में गंगा में लगाए गए प्रतिबंधित जाल को हटाना डॉल्फिन संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बताया जाता है कि इस्माइलपुर प्रखंड क्षेत्र में भी कुछ वर्ष पहले डॉल्फिन से जुड़ी ऐसी घटना सामने आई थी। इस पृष्ठभूमि में गंगा में अवैध रूप से लगाए जा रहे महाजाल पर रोक लगाने और आश्रयणी क्षेत्र की नियमित निगरानी की जरूरत और बढ़ गई है।

प्रतिबंधित जाल हटाएं, अन्यथा होगी कड़ी कार्रवाई

वन प्रमंडल पदाधिकारी आशुतोष राज ने स्पष्ट किया है कि विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन आश्रयणी क्षेत्र में प्रतिबंधित जाल लगाने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। वन विभाग ने संबंधित मछुआरों से गंगा में लगाए गए प्रतिबंधित जाल को तत्काल हटाने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि जाल नहीं हटाने पर उसे जब्त कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि प्रतिबंधित जाल हटाने की कार्रवाई और आश्रयणी क्षेत्र की निगरानी लगातार जारी रहनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि वरीय अधिकारियों के निर्देश पर केवल खानापूर्ति के लिए कार्रवाई की जाए और बाद में निगरानी ढीली पड़ जाए। डॉल्फिन संरक्षण के लिए नियमित गश्त, जाल की जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। कार्रवाई के दौरान वन परिसर पदाधिकारी बिहपुर विजय कुमार सिंह, शिवम कुमार, राजीव कुमार, कुंदन कुमार, राकेश कुमार यादव, कल्पना कुमारी, प्रिया कुमारी सहित अन्य वनकर्मी मौजूद थे। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि डॉल्फिन आश्रयणी क्षेत्र में प्रतिबंधित जाल के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए निगरानी और कार्रवाई जारी रहेगी।

बालमुकुन्द की रिपोर्ट