विद्यालय भवन निर्माण में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 1 करोड़, बनने से पहले ही छत से टपकने लगा पानी

भागलपुर के गोपालपुर में 1 करोड़ की लागत से बन रहे कालिंदी नगर विद्यालय भवन की छत पहली बरसात से पहले ही टपकने लगी है। निर्माण में घटिया सामग्री और अधिकारियों की लापरवाही के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है।

Bhagalpur : बिहार के भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड स्थित कालिंदी नगर विद्यालय में शिक्षा के मंदिर के नाम पर सरकारी धन की जमकर बंदरबांट की जा रही है। करीब 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनाए जा रहे छह कमरों के भवन में निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही गंभीर खामियां उजागर हो गई हैं। आलम यह है कि पहली मंजिल की छत से बारिश की बूंदों की तरह पानी टपक रहा है, जिसने निर्माण की गुणवत्ता और भविष्य में बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

करोड़ों खर्च, फिर भी निर्माण में घटिया सामग्री का खेल

स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन ने निर्माण एजेंसी पर मानकों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन निर्माण में घटिया बालू, सीमेंट और छड़ का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी वजह से फिनिशिंग से पहले ही छत से रिसाव शुरू हो गया है। अगर भवन की पहली मंजिल का यह हाल है, तो आने वाले समय में इसकी मजबूती और स्थायित्व को लेकर संशय गहरा गया है, जो सीधे तौर पर मासूम बच्चों और शिक्षकों की जान के साथ खिलवाड़ है।

डेडलाइन खत्म, फिर भी अधूरा पड़ा है निर्माण कार्य


हैरानी की बात यह है कि इस विद्यालय भवन का निर्माण कार्य पिछले 12 महीनों से अधिक समय से चल रहा है। विभाग द्वारा समय सीमा (डेडलाइन) बढ़ाते हुए मार्च तक काम पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया था, लेकिन अप्रैल शुरू होने के बावजूद भवन अधूरा पड़ा है। समय पर काम पूरा न होना और निर्माण में भारी तकनीकी खामियां मिलना, सीधे तौर पर निर्माण एजेंसी की कार्यशैली और विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

नियम ताक पर: सूचना बोर्ड नदारद, इंजीनियरों की भूमिका संदिग्ध

सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी विकास योजना के स्थल पर सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है, ताकि जनता को योजना की लागत, एजेंसी और समय सीमा की जानकारी मिल सके। लेकिन कालिंदी नगर विद्यालय में ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि पारदर्शिता से बचने के लिए जानबूझकर बोर्ड नहीं लगाया गया है ताकि भ्रष्टाचार को दबाया जा सके।

अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: JE ने काटा फोन

इस भ्रष्टाचार के खेल में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जब इस संबंध में जूनियर इंजीनियर (JE) रामविलास से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने "रॉन्ग नंबर" कहकर फोन काट दिया और जवाब देने से बचते नजर आए। वहीं, सहायक कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार ने माना कि ढलाई के समय इंजीनियर की मौजूदगी अनिवार्य होती है और छत से पानी टपकना एक गंभीर मामला है। उन्होंने जांच और सुधार का आश्वासन दिया है।

ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, दोषी ठेकेदार और लापरवाह इंजीनियरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि जब तक स्वतंत्र एजेंसी से भवन की गुणवत्ता की जांच नहीं हो जाती, तब तक इसे बच्चों के उपयोग के लिए हैंडओवर न किया जाए।


रिपोर्ट: बालमुकुंद कुमार लोकेशन: भागलपुर