Bihar News : बक्सर के निजी अस्पताल में महिला की मौत पर भारी बवाल, दोनों पक्षों ने दर्ज कराया FIR, CCTV खंगाल रही पुलिस
Bihar News : बक्सर के 'पार्वती मेमोरियल अस्पताल' एक बार फिर गंभीर विवादों और हंगामे के केंद्र में आ गया है। बीती 12 मई को अस्पताल में भर्ती एक महिला मरीज की मौत के बाद अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।
BUXAR : बक्सर का चर्चित पार्वती मेमोरियल अस्पताल एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गया है। 12 मई को अस्पताल में भर्ती एक महिला मरीज की मौत के बाद ऐसा हंगामा मचा कि मामला सीधे पुलिस थाने तक पहुंच गया। अब नगर थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर क्रॉस FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एक तरफ मृतका के परिजन अस्पताल प्रबंधन पर “पैसों के लिए ऑक्सीजन रोकने” जैसा बेहद गंभीर और मानवता को झकझोर देने वाला आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन पूरे मामले को डॉक्टरों और स्टाफ पर हमला बताकर खुद को निर्दोष बता रहा है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद ने पूरे शहर में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
परिजनों का आरोप — 1 लाख नहीं दिए, इसलिए मां की सांसें छीन ली गईं”
मृतका निर्मला देवी के पुत्र अमित कुमार ने नगर थाना में दिए आवेदन में अस्पताल प्रबंधन पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। परिजनों के अनुसार, 12 मई की शाम गंभीर हालत में निर्मला देवी को पार्वती मेमोरियल अस्पताल लाया गया था। उस समय उन्हें तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत थी। लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट बंद था। अमित कुमार का आरोप है कि जब परिजनों ने ऑक्सीजन चालू करने की गुहार लगाई, तब अस्पताल प्रबंधन की ओर से कथित तौर पर ₹1 लाख जमा करने की मांग की गई। परिजनों का दावा है कि पैसे नहीं देने पर ऑक्सीजन चालू नहीं किया गया और मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। इतना ही नहीं, विरोध करने पर अस्पताल प्रबंधक अनिल कुमार सिंह और उनके स्टाफ द्वारा परिजनों के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि धारदार हथियार से हमला किया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
परिजनों के मुताबिक
इस घटना में कई लोग घायल हो गए। जिसमें पुष्कर राज का सिर फट गया, राजेश कुमार की उंगली टूट गयी। वहीँ प्रफुल्ल राज ने गले से सोने की चेन छीनने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि बाद में वे मरीज को दूसरे अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतका के पुत्र का कहना है कि “अगर समय पर ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाता और सही इलाज होता, तो मेरी मां आज जिंदा होतीं।”
अस्पताल प्रबंधन ने कहा
वहीं, पार्वती मेमोरियल अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के सभी आरोपों को बेबुनियाद और अस्पताल की छवि खराब करने की कोशिश बताया है। अस्पताल प्रबंधक अनिल कुमार सिंह का कहना है कि मरीज की स्थिति पहले से ही अत्यंत गंभीर थी। डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें बड़े अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी थी। प्रबंधन का आरोप है कि रेफर की बात सुनते ही परिजन उग्र हो गए और जबरन डॉक्टर के चेंबर में घुसकर डॉक्टरों व स्टाफ के साथ मारपीट शुरू कर दी। अस्पताल में तोड़फोड़ और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से पेश कर अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
20 दिनों में दूसरा बड़ा विवाद, अस्पताल की कार्यशैली पर उठे सवाल
हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब पार्वती मेमोरियल अस्पताल विवादों में घिरा हो। बताया जा रहा है कि इससे पहले 27 अप्रैल को भी प्रसव के बाद एक महिला मरीज की तबीयत बिगड़ने पर उसे रेफर किया गया था और रास्ते में उसकी मौत हो गई थी। उस मामले में भी अस्पताल की महिला डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही के आरोप लगे थे। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने शहर में निजी अस्पतालों की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
अब CCTV फुटेज बनेगा सबसे बड़ा सबूत
नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब अस्पताल परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि घटनास्थल की रिकॉर्डिंग से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर अस्पताल में क्या हुआ था। क्या वास्तव में इलाज में लापरवाही हुई, या फिर अस्पताल में हमला और तोड़फोड़ की गई। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
सबसे बड़ा सवाल
क्या वाकई एक मां की जिंदगी पैसों की मांग के बीच उलझ गई? क्या ऑक्सीजन जैसी जीवनरक्षक सुविधा को लेकर सौदेबाजी हुई? या फिर गंभीर मरीज की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में कानून हाथ में ले लिया? इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच और CCTV फुटेज तय करेंगे।
संदीप की रिपोर्ट