कटावरोधी कार्य मे अनियमितता के खिलाफ दियारा के लोगो का अनोखा विरोध, कटाव पीड़ितों ने ली जलसमाधी
मानसून की आहट और गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच इस बार फिर से सबलपुर दियारा के कई गांवों पर नदी में समा जाने का खतरा मंडरा रहा है।जल संसाधन विभाग द्वारा इस वर्ष कराए जा रहे कटावरोधी कार्यों में भारी अनियमितता का आरोप लग रहा है....
Chapra : पिछले कई वर्षों से लगातार भीषण कटाव की मार झेल रहे सोनपुर के सबलपुर दियारा इलाके में एक बार फिर तबाही का खतरा मंडराने लगा है। पिछले साल गंगा नदी के रौद्र रूप के कारण हुई भारी बर्बादी के बाद, जल संसाधन विभाग द्वारा इस वर्ष कराए जा रहे कटावरोधी कार्यों में भारी अनियमितता का आरोप लग रहा है। विभाग की इसी लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो दियारा का अस्तित्व पूरी तरह मिट जाएगा।
रिंग बांध बनाओ संघर्ष समिति के बैनर तले फूटा गुस्सा, बनाई मानव श्रृंखला
कटावरोधी कार्यों में बरती जा रही धांधली के विरोध में आज 'रिंग बांध बनाओ संघर्ष समिति' के बैनर तले सबलपुर नया बाजार घाट पर ग्रामीणों ने उग्र धरना-प्रदर्शन किया। आज सुबह 7 बजे से ही भारी संख्या में स्थानीय पुरुष, महिलाएं और युवा नया बाजार घाट पर जुटना शुरू हो गए थे। विरोध दर्ज कराने के लिए ग्रामीणों ने न केवल घाट पर एक लंबी मानव श्रृंखला बनाई, बल्कि गंगा नदी के पानी में उतरकर सांकेतिक जलसमाधि भी ली। विरोध का यह अनोखा और संवेदनशील तरीका पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
गुणवत्तापूर्ण कार्य और स्थाई समाधान के लिए सारण जिला प्रशासन से गुहार
प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि कटावरोधी कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल और भारी अनियमितता बरती जा रही है, जिससे गंगा नदी से होने वाला कटाव रुकने के बजाय खतरा और ज्यादा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने सारण जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक यहां एक मजबूत रिंग बांध और गुणवत्तापूर्ण कटावरोधी कार्य सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक उनकी सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहेगी।
पिछले साल विलीन हो गया था पश्चिमी टोला, दर्जनों परिवारों ने किया था पलायन
स्थानीय लोगों के इस डर और आक्रोश के पीछे पिछले साल की एक कड़वी और दर्दनाक हकीकत है। बता दें कि पिछले वर्ष सोनपुर के सबलपुर का पूरा पश्चिमी टोला भीषण कटाव की चपेट में आकर पूरी तरह गंगा नदी में विलीन हो गया था। उस आपदा में अपना सब कुछ गंवा देने के बाद दर्जनों परिवारों को गांव से पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। बेघर हुए उन परिवारों का जख्म अभी भरा भी नहीं था कि दोबारा वैसी ही स्थिति पैदा होने लगी है।
अस्तित्व बचाने की जंग: डर और दहशत के साए में जीने को मजबूर दियारा वासी
मानसून की आहट और गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच इस बार फिर से सबलपुर दियारा के कई गांवों पर नदी में समा जाने का खतरा मंडरा रहा है। इस आसन्न संकट को देखते हुए पूरे इलाके में डर और दहशत का माहौल है। अपनी जमीन, मकान और अस्तित्व को बचाने के लिए यहां के ग्रामीण अब अलग-अलग और अनोखे तरीकों से सरकार और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो वे अपने आशियाने को बचाने के लिए आंदोलन को और तेज करेंगे।
रिषभ की रिपोर्ट