Saran Canal Breach:घटिया निर्माण की खुली पोल! 3 महीने पहले बनी पुलिया के पास बांध टूटने से किसानों में हड़कंप
सारण जिले के मशरक प्रखंड के सोनौली गांव में गुरुवार को नहर का बांध टूटने से खेतों में तेजी से पानी फैल रहा है! किसानों की धान की फसलों पर भारी नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।महज 3 महीने पहले बनी साइफन पुलिया की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल।
सारण जिले के मशरक प्रखंड अंतर्गत सोनौली गांव में गुरुवार सुबह नहर का बांध टूटने से किसानों के सामने फसल बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है। लगातार बारिश के बीच नहर में बढ़े पानी के दबाव से बांध के समीप बनी साइफन पुलिया के पास रिसाव शुरू हुआ। देखते ही देखते पानी के तेज बहाव से मिट्टी का कटाव हुआ और बांध टूट गया। इसके बाद नहर का पानी आसपास के खेतों में फैलने लगा। खेतों में पानी घुसने से किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरने की आशंका है।
इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए नहर के बांध पर करीब तीन माह पहले साइफन पुलिया का निर्माण कराया गया था। निर्माण के कुछ ही महीने बाद पुलिया के आसपास से पानी का रिसाव शुरू होना और फिर बांध का टूट जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते रिसाव को रोकने और बांध की मरम्मत कराने की पहल की जाती तो स्थिति बिगड़ने से बच सकती थी।
पुलिया के पास रिसाव बना बांध टूटने का कारण
स्थानीय पंचायत के मुखिया इम्तियाज खान उर्फ चुन्नू बाबू ने बताया कि गुरुवार सुबह पुलिया के आसपास पानी का रिसाव दिखाई दिया। लगातार पानी रिसने के कारण मिट्टी बहती चली गई। इसके बाद पानी के दबाव से बांध टूट गया और नहर का पानी खेतों की ओर तेजी से बहने लगा। उन्होंने कहा कि तीन माह पहले बनी पुलिया के आसपास इतनी जल्दी मिट्टी का कटाव होना गंभीर मामला है। इसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए।
मुखिया ने घटना की जानकारी विभागीय अधिकारियों के साथ- साथ सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को भी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द बांध को नहीं बांधा गया तो नहर का पानी और अधिक खेतों में फैल सकता है। इससे धान समेत अन्य फसलों को व्यापक नुकसान होने की आशंका है। बांध टूटने की सूचना मिलते ही विभाग के कनीय अभियंता मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को करीब एक घंटे के अंदर बांध की मरम्मत शुरू कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद बीडीओ पंकज कुमार और थानाध्यक्ष उज्ज्वल कुमार भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से बांध की तत्काल मरम्मत कराने के साथ ही साइफन पुलिया के निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि खेती का समय बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि नहर का पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो तैयार होती फसल को नुकसान पहुंच सकता है और किसानों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि महज तीन महीने पहले बने निर्माण के आसपास मिट्टी का कटाव और बांध का टूटना केवल बारिश और पानी के दबाव का मामला है या निर्माण में कहीं कमी रही है, इसकी जांच जरूरी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही इसकी वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
सारण से धर्मेन्द्र रस्तोगी की रिपोर्ट