बिहार में बना 51वां रेल इंजन अफ्रीका के गिनी रवाना, रेल मंत्री और सीएम ने दिखाई हरी झंडी, बिहार को मिला 10,000 करोड़ का रेल बजट
सारण जिले के मढ़ौरा स्थित डीजल रेल इंजन कारखाने ने वैश्विक पटल पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. अफ्रीका के 'गिनी गणराज्य' को निर्यात होने वाले 51वें शक्तिशाली रेल इंजन (WDG4G) को रेल मंत्री और सीएम ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया...
Chapra : बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा स्थित डीजल रेल इंजन कारखाने (लोकोमोटिव फैक्ट्री) ने वैश्विक पटल पर एक और बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक भव्य समारोह के दौरान इस फैक्ट्री से अफ्रीका के 'गिनी गणराज्य' को निर्यात (एक्सपोर्ट) होने वाले 51वें शक्तिशाली रेल इंजन (WDG4G) को संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक मौके पर सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी और महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल समेत रेलवे के कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे। यह उपलब्धि 'मेक इन बिहार' और 'मेक इन इंडिया' की बढ़ती वैश्विक ताकत को दर्शाती है।
पीएम मोदी के विजन का परिणाम, दुनिया में डंका बजा रही बिहार की टेक्नोलॉजी
लोकोमोटिव फैक्ट्री परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह पूरे देश और विशेषकर बिहार के लिए बेहद गौरव की बात है कि यहां के मढ़ौरा में बने रेल इंजन आज अपनी ताकत और बेजोड़ टेक्नोलॉजी के दम पर पूरी दुनिया में नाम कमा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2017 में इस फैक्ट्री की शुरुआत की थी और उनका एक ही स्पष्ट विजन था कि यहां बनने वाले लोकोमोटिव दुनिया की नंबर वन तकनीक से लैस हों। आज वह सपना पूरी तरह धरातल पर सच साबित होता दिख रहा है।
पहले भी भेजे जा चुके हैं 50 इंजन, 4 करोड़ से अधिक का मिला जीएसटी रेवेन्यू
रेल मंत्री ने फैक्ट्री की कार्यकुशलता की सराहना करते हुए बताया कि मढ़ौरा प्लांट से गिनी गणराज्य के लिए यह 51वां रेल इंजन एक्सपोर्ट किया जा रहा है। इससे पहले भी इस कारखाने से 50 इंजनों का सफल निर्यात विदेशों में किया जा चुका है, जहां से बेहद शानदार और सकारात्मक परिणाम (रिजल्ट) सामने आए हैं। विदेशी धरती पर इन इंजनों के बेहतर प्रदर्शन के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ा है। इसके साथ ही इस फैक्ट्री के संचालन और उत्पादन से सरकार को 4 करोड़ रुपये से अधिक का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व (रेवेन्यू) भी प्राप्त हुआ है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
2014 से पहले की सरकारों पर तीखा तंज; केवल घोषणाएं होती थीं, काम नहीं
इस दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साल 2014 से पहले केंद्र में रही विपक्षी सरकारों और पूर्व रेल मंत्रियों पर जमकर राजनीतिक तंज कसा। उन्होंने बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में बिहार के लिए सिर्फ बड़े-बड़े वादे और कारखानों के ऐलान किए जाते थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता था। घोषणाएं तो कर दी जाती थीं, परंतु योजनाओं को पूरा करने के लिए फंड (बजट) का कोई अता-पता नहीं रहता था। उन्होंने मढ़ौरा फैक्ट्री का उदाहरण देते हुए कहा कि इसका भी सिर्फ ऐलान हुआ था लेकिन काम लटका रहा, जिसे आखिरकार प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने ही पूरा करके दिखाया।
बिहार रेलवे के विकास के लिए 10,000 करोड़; विशेष पैकेज से भी बड़ा बजट
रेल मंत्री ने केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मन में बिहार और यहां की रेल व्यवस्था के विकास के लिए अटूट श्रद्धा और प्रतिबद्धता है। यही कारण है कि मोदी सरकार ने बिहार में रेलवे के कायाकल्प और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹10,000 करोड़ (दस हजार करोड़ रुपये) का भारी-भरकम फंड आवंटित किया है। इसी ऐतिहासिक बजट के कारण आज बिहार में रेलवे से जुड़ी कई बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजनाएं तेजी से सफल हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र द्वारा दिया गया यह रेल पैकेज किसी भी अन्य विशेष पैकेज से कहीं अधिक बड़ा और प्रभावी है।
रिषभ की रिपोर्ट