Bihar News: 150 एकड़ के मोईन पोखर पर कब्जा, NGT सख्त, नगर आयुक्त को 30 अक्टूबर को व्यक्तिगत पेशी का आदेश

Bihar News:दरभंगा शहर के महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलस्रोत मोईन पोखर के सीमांकन और अतिक्रमण से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), पूर्वी क्षेत्र कोलकाता ने सख्त रुख अपनाया है।..

मोईन पोखर पर कब्जा- फोटो : reporter

Bihar News:दरभंगा शहर के महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलस्रोत मोईन पोखर के सीमांकन और अतिक्रमण से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), पूर्वी क्षेत्र कोलकाता ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने दरभंगा नगर निगम के नगर आयुक्त को 30 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। अदालत ने मोईन पोखर के सीमांकन और अब तक की गई कार्रवाई से संबंधित विस्तृत जानकारी भी मांगी है।

यह मामला ओ.ए. नंबर 14/2014 से संबंधित बताया जा रहा है। ‘तालाब बचाओ अभियान’ की ओर से लंबे समय से मोईन पोखर को अतिक्रमण से मुक्त कराने और इसके संरक्षण का मुद्दा उठाया जाता रहा है। मामले में वर्ष 2025 में पोखर के रकबे का सीमांकन कर उसे अतिक्रमण से मुक्त कराने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी। निर्धारित कार्रवाई में कथित देरी को लेकर NGT ने नाराजगी जताई है।

याचिकाकर्ता पक्ष नारायण जी चौधरी का आरोप है कि मोईन पोखर के किसी भी मौजा का अब तक अपेक्षित तरीके से सीमांकन नहीं किया गया है। उनका दावा है कि पोखर का विस्तार दरभंगा सदर और बहादुरपुर अंचल के कई मौजों तक है और इसका रकबा 150 एकड़ से अधिक बताया जाता है।याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि पोखर की जमीन के बड़े हिस्से पर भू-माफिया और दबंग लोगों का कब्जा है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

मामले में बताया गया है कि सदर अंचल की ओर से करीब 84 लोगों को नोटिस देने के लिए कर्मचारी भेजे गए थे, लेकिन कथित तौर पर कुछ दबंग लोगों के हस्तक्षेप के कारण नोटिस की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे।

अगली सुनवाई में NGT ने नगर आयुक्त को मोईन पोखर से संबंधित पुराने राजस्व रिकॉर्ड, अतिक्रमण की मौजूदा स्थिति और सीमांकन के लिए अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।मोईन पोखर सिर्फ एक तालाब नहीं, बल्कि दरभंगा के महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलक्षेत्रों में शामिल बताया जाता है। इतने बड़े जलक्षेत्र के सीमांकन, संरक्षण और अतिक्रमण से जुड़े मामले का पर्यावरणीय महत्व भी है।

अब 30 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। नगर आयुक्त की व्यक्तिगत पेशी और उनके द्वारा ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली कार्रवाई रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकता है कि मोईन पोखर के सीमांकन और कथित अतिक्रमण को लेकर प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।

रिपोर्ट- वरुण कुमार ठाकुर