Railway Police gold robbery: हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस सोना लूट कांड! रेल पुलिस के 4 सिपाहियों समेत 6 आरोपितों पर गिरफ्तारी वारंट

Railway Police gold robbery: हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस में सोना लूट कांड में रेल पुलिस की संलिप्तता उजागर। गया रेल थाना के चार सिपाहियों समेत छह आरोपितों के खिलाफ रेल न्यायालय ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।

सोना लूट मामले में रेल पुलिस की गिरफ्तारी- फोटो : social media

Railway Police gold robbery:  हावड़ा-जोधपुर (हावड़ा–बीकानेर) एक्सप्रेस में यात्री से सोना लूट की सनसनीखेज घटना ने पूरे रेल महकमे को हिला कर रख दिया है। इस हाईप्रोफाइल कांड में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि यात्री सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले रेल पुलिस के जवान ही इस लूट में शामिल थे। अब मामले में कार्रवाई और तेज हो गई है। गया रेल थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में चार सिपाहियों और दो सिविलियनों के खिलाफ रेल न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।

इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने वारंट प्राप्त करने के बाद फरार आरोपितों की तलाश तेज कर दी है। रेल पुलिस और प्रशासनिक हलकों में इसे विभागीय साख से जुड़ा बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है।

रेल न्यायालय से छह आरोपितों के खिलाफ वारंट जारी

रेल न्यायालय की तरफ से जिन लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निर्गत किया गया है, उनमें गया रेल थाना के चार सक्रिय सिपाही शामिल हैं, जो इस प्रकार है करण कुमार,अभिषेक चतुर्वेदी,रंजय कुमार और आनंद मोहन। इनके अलावा दो सिविलियन भी नामजद हैं, जो परवेज आलम और रेल थाना का पूर्व चालक सीताराम उर्फ अमन शर्मा। एसआईटी के अनुसार, यदि इन सभी आरोपितों ने जल्द गिरफ्तारी नहीं दी या न्यायालय में आत्मसमर्पण नहीं किया, तो अगली कानूनी प्रक्रिया के तहत इश्तिहार जारी किया जाएगा, और उसके बाद कुर्की-जब्ती की कार्रवाई भी की जाएगी।

सोने से भरी यात्रा बनी लूट का शिकार

यह घटना 21 नवंबर की है, जब कानपुर के स्वर्ण व्यवसायी मनोज सोनी का कर्मचारी धनंजय शाश्वत सोने के आभूषण लेकर हावड़ा–बीकानेर एक्सप्रेस से यात्रा कर रहा था। बताया जाता है कि किसी तरह इसकी सूचना गया रेल थाना के कुछ पुलिसकर्मियों तक पहुंच गई। इसके बाद साजिश के तहत चार सिपाही और दो सिविलियन कोडरमा स्टेशन पर ट्रेन में सवार हुए। गया पहुंचने से पहले आरोपितों ने धनंजय शाश्वत के साथ मारपीट की और उससे सोना लूट लिया। वारदात को इस तरह अंजाम दिया गया कि शुरुआत में यह सामान्य लूट प्रतीत हो, लेकिन जांच में सच्चाई सामने आ गई।

वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची शिकायत, फिर हुआ बड़ा खुलासा

घटना की जानकारी जब रेल पुलिस के वरीय अधिकारियों तक पहुंची, तब मामले की गंभीरता को देखते हुए 29 नवंबर को गया रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई। रेल पुलिस पटना ने इस मामले को विभागीय छवि से जुड़ा मानते हुए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। जांच में जो तथ्य सामने आए, वे और भी चौंकाने वाले थे।

SIT जांच में रेल थानाध्यक्ष समेत सभी की संलिप्तता साबित

SIT की जांच में गया रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, चारों सिपाहियों और दोनों सिविलियनों की प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने आई। इसके बाद रेल पुलिस ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए गया रेल थानाध्यक्ष, चारों सिपाहियों को निलंबित कर दिया। थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि बाकी सभी आरोपित फरार चल रहे हैं।