गया में 'विष्णु कॉरिडोर' पर बवाल! 500 मीटर का दायरा बना गले की फांस, उजड़ने के डर से पंडा समाज और स्थानीय लोग सड़क पर
गया जी में प्रस्तावित 'विष्णु कॉरिडोर' अब स्थानीय निवासियों के लिए दुस्वप्न बनता जा रहा है। नीतीश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के विरोध में पंडा समाज और स्थानीय लोग मुखर हो गए हैं।
Gayaji - मोक्ष की भूमि गया जी में प्रस्तावित 'विष्णु कॉरिडोर' अब स्थानीय निवासियों के लिए दुस्वप्न बनता जा रहा है। नीतीश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के विरोध में पंडा समाज और स्थानीय लोग मुखर हो गए हैं। कॉरिडोर के लिए विष्णुपद मंदिर के आसपास 500 मीटर के दायरे को चिन्हित किए जाने से हजारों मकानों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक गई है। आलम यह है कि चंद चौराहा मोड़ तक के तमाम रिहाइशी और व्यावसायिक निर्माणों को हटाने की योजना है, जिससे स्थानीय लोगों में अपनी छत छिनने का खौफ पैदा हो गया है।
रबर डैम का कड़वा अनुभव: पंडा समाज ने जताई आपत्ति
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में निर्मित रबर डैम का अनुभव भी सुखद नहीं रहा है। पंडा समाज के अनुसार, रबर डैम के जमा पानी में स्नान करने से श्रद्धालुओं को चर्म रोग होने का खतरा बढ़ गया है। अब उसी तर्ज पर कॉरिडोर के नाम पर ऐतिहासिक और पारंपरिक बस्तियों को उजाड़ने की तैयारी है। पंडा समाज का एक वर्ग साफ कह रहा है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की नींव "विनाश" पर नहीं रखी जानी चाहिए।
"पर्यटन स्थल नहीं, यह पिंड क्षेत्र है": कॉरिडोर को छोटा करने की मांग
स्थानीय लोगों और पंडा समाज ने सरकार के सामने अपनी मांगें स्पष्ट कर दी हैं:
दायरा कम हो: काशी, मथुरा और विंध्याचल की तर्ज पर कॉरिडोर को 500 मीटर के बजाय 50 से 100 गज तक ही सीमित रखा जाए।
परंपरा का सम्मान: गया जी मूलतः सैलानियों के घूमने की जगह नहीं, बल्कि एक पवित्र पिंडदान क्षेत्र है। यहाँ पितृपक्ष के दौरान 25 लाख तक लोग आते हैं। ऐसे में विशाल कॉरिडोर के बजाय धार्मिक जरूरतों के हिसाब से विकास हो।
रोजगार का संकट: 500 मीटर के दायरे में हजारों लोग पीढ़ियों से रह रहे हैं और वहीं से उनका रोजगार चलता है। कॉरिडोर के बड़े नक्शे से इन सबका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा।
10 तारीख को फाइनल नक्शे पर टिकी निगाहें- आगामी 10 तारीख को प्रशासन की ओर से फाइनल नक्शा जारी होने वाला है। इस नक्शे के आने से पहले ही गया में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना किया, तो वे अपने आशियाने को बचाने के लिए बड़ा आंदोलन करेंगे।
Report - Manoj kumar