गोपालगंज की सासामुसा चीनी मिल के दिन बहुरेंगे; निरीक्षण के बाद पुनरुद्धार की कवायद तेज, किसानों में जगी आस

बिहार की बंद पड़ी 25 चीनी मिलों को शुरू करने की कड़ी में शुक्रवार को गोपालगंज की सासामुसा मिल का निरीक्षण हुआ। गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव और कर्नाटक के निरानी ग्रुप ने मिल के पुनरुद्धार और किसानों के बकाया भुगतान पर चर्चा की।

Gopalganj - : बिहार सरकार द्वारा राज्य की बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने के अभियान ने अब रफ्तार पकड़ ली है। इसी कड़ी में शुक्रवार को गोपालगंज की ऐतिहासिक सासामुसा चीनी मिल का उच्चस्तरीय निरीक्षण किया गया। कर्नाटक के प्रसिद्ध निरानी ग्रुप और बिहार सरकार के अधिकारियों के दौरे के बाद अब इस मिल के दोबारा चालू होने की प्रबल संभावना बन गई है, जिससे क्षेत्र के हजारों किसानों और श्रमिकों के चेहरों पर खुशी लौट आई है।

हेलीकॉप्टर से पहुंचे अधिकारी और निवेशक


गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल और निरानी ग्रुप के चेयरमैन दुर्गेश निरानी विशेष हेलीकॉप्टर से सासामुसा पहुंचे। निरीक्षण के दौरान गन्ना उद्योग विभाग के आयुक्त जेपीएन सिंह और कई स्थानीय अधिकारी भी मौजूद रहे। टीम ने मिल की वर्तमान स्थिति, मशीनरी और उपलब्ध भूमि का बारीकी से जायजा लिया।

मल्टी-प्रोडक्ट यूनिट के रूप में होगा विकास

निरीक्षण के बाद निरानी ग्रुप के चेयरमैन दुर्गेश निरानी ने बताया कि वे सासामुसा को केवल चीनी मिल तक सीमित नहीं रखना चाहते। कंपनी का प्रस्ताव है कि यहाँ गन्ने के साथ-साथ धान और मकई के किसानों से बायो-प्रोडक्ट खरीदकर उत्पादन किया जाए। इससे जिले के गन्ना, चावल और मकई—तीनों तरह के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

जमीन और विस्तार की योजना

दुर्गेश निरानी ने बताया कि वर्तमान में मिल के पास लगभग 40-45 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जबकि कुछ हिस्सा लीज पर है। विस्तारित परियोजना और आधुनिक प्लांट लगाने के लिए अतिरिक्त जमीन की जरूरत होगी, जिसके लिए सरकार के साथ चर्चा की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी कंपनी, जो पहले से ही सीतामढ़ी की रीगा चीनी मिल को शुरू करने की प्रक्रिया में है, बिहार के औद्योगिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

बकाया भुगतान पर सरकार का रुख

अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल ने कहा कि मिल के पुनरुद्धार के साथ-साथ किसानों और पूर्व कर्मचारियों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी सरकार की प्राथमिकता में है। निरीक्षण के दौरान इस पर विस्तृत चर्चा हुई है। सरकार इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है ताकि मिल शुरू होने से पहले सभी कानूनी और वित्तीय बाधाओं को दूर किया जा सके।

भयावह हादसे के बाद बंद हुई थी मिल

बता दें कि दिसंबर 2017-18 में सासामुसा चीनी मिल में बॉयलर फटने से एक बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें 9 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस त्रासदी के बाद मिल पूरी तरह बंद हो गई थी। अब वर्षों बाद सरकार की इस पहल से गोपालगंज की सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को एक नया सहारा मिलता दिख रहा है।

अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बूस्ट

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और निरानी ग्रुप के बीच सहमति बनती है, तो यह गोपालगंज और आसपास के जिलों के लिए वरदान साबित होगा। इससे न केवल प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, बल्कि सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। किसानों को अपनी फसल का उचित दाम और समय पर भुगतान मिलने की उम्मीद जगी है।


Report - namo narayan mishra