Bihar News : अवैध वसूली का अड्डा बना मोहनिया चेक पोस्ट, एक महीने में दूसरी बार हुई छापेमारी, 3 सैप जवान सहित चार को पुलिस ने किया गिरफ्तार

Bihar News : कैमूर में वाहन चालकों से अवैध उगाही करते हुए सैप के तीन जवानों और एक होमगार्ड जवान को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इनके पास से 83,300 रुपये नगद और चार मोबाइल फोन जप्त किए हैं।

अवैध वसूली का अड्डा - फोटो : DEVBRAT

KAIMUR : जिले के मोहनिया स्थित समेकित जांच चौकी पर पुलिस ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। कैमूर एसपी शिखर चौधरी के निर्देश पर यातायात डीएसपी और मोहनिया थाना की संयुक्त टीम ने बीती रात अचानक छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान समेकित जांच चौकी पर वाहन चालकों से धड़ल्ले से अवैध उगाही करते हुए सैप के तीन जवानों और एक होमगार्ड जवान को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।

छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने रंगे हाथ पकड़े गए जवानों के पास से 83,300 रुपये नगद और चार मोबाइल फोन जप्त किए हैं। मामले की जानकारी देते हुए मोहनिया डीएसपी गोपाल कृष्ण ने बताया कि समेकित जांच चौकी से 83,300 रुपये की नगदी के साथ चार जवानों को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर उनसे सघन पूछताछ कर रही है और मामले की आगे की गहन जांच-पड़ताल जारी है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सैप जवान गंगासागर सिंह, बच्चू प्रसाद और मनीराम शर्मा के रूप में हुई है, जबकि चौथा आरोपी सुनील कुमार गुप्ता होमगार्ड का जवान है। पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से अवैध वसूली के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि एक महीने के भीतर मोहनिया की इस चर्चित जांच चौकी पर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पूर्व भी पुलिस ने छापेमारी कर 4 सैप जवानों और 5 निजी सहायकों समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस तरह महज़ एक महीने के भीतर इस जांच चौकी से अवैध उगाही के मामले में अब तक कुल 13 सुरक्षाकर्मियों और सहायकों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जो इलाके में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को दर्शाता है।

इस पूरी घटना में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि समेकित जांच चौकी पर 24 घंटे तीनों शिफ्टों में अधिकारियों की तैनाती रहती है। इसके बावजूद जांच चौकी प्रभारी आलोक कुमार को इस अवैध उगाही की भनक तक नहीं लग सकी। उच्च विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद बेधड़क चल रहा वसूली का यह खेल स्थानीय प्रशासनिक कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।

देवब्रत की रिपोर्ट