न सड़क, न लोग, न जरूरत... फिर भी बन गई लाखों की पुलिया! मोतिहारी में विकास का अनोखा प्रयोग या भ्रष्टाचार
ग्रामीणों के बीच वायरल हो रहे फोटो और वीडियो में कई पुलिया ऐसे स्थानों पर दिखाई दे रहे हैं, जहां आसपास कोई सड़क मौजूद नहीं है। कुछ पुलिया नदी के किनारे और नदी की पेटी के भीतर बनाए गए हैं।
Bihar News : मोतिहारी जिले के केसरिया प्रखंड में मनरेगा योजना के तहत कराए गए निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रखंड की ढेकहा पंचायत में गंडक नदी की पेटी और चेवर क्षेत्र में बिना संपर्क मार्ग के चार पुलिया बनाए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन स्थानों पर पुलिया का निर्माण कराया गया है, वहां न तो कोई सड़क है और न ही नियमित आवागमन की आवश्यकता दिखाई देती है। ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर कराए गए निर्माण कार्यों की उपयोगिता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों के बीच वायरल हो रहे फोटो और वीडियो में कई पुलिया ऐसे स्थानों पर दिखाई दे रहे हैं, जहां आसपास कोई सड़क मौजूद नहीं है। कुछ पुलिया नदी के किनारे और नदी की पेटी के भीतर बनाए गए हैं। इसे लेकर लोगों का कहना है कि योजना के चयन और क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं तथा इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
जानकारी के अनुसार, केसरिया प्रखंड की ढेकहा पंचायत के वार्ड संख्या-4 स्थित मझरिया गांव में नदी क्षेत्र के भीतर दो पुलिया बनाए गए हैं। इनमें से एक पुलिया ऐसे स्थान पर स्थित है, जहां कोई संपर्क मार्ग नहीं है और वह क्षेत्र नदी का हिस्सा माना जाता है। वहीं दूसरे पुलिया की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
इसी पंचायत के वार्ड संख्या-11 में भी दो अन्य पुलिया बनाए गए हैं। इनमें एक गाइड बांध के समीप नदी क्षेत्र में और दूसरा सतरघाट माई स्थान के पास स्थित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन स्थानों पर पुलिया निर्माण की कोई विशेष आवश्यकता नहीं थी। आरोप है कि योजना के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया और बिना जरूरत के निर्माण कार्य स्वीकृत कराए गए। ग्रामीणों का दावा है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए तो कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। लोगों ने अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, मामले में केसरिया प्रखंड के मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) आशुतोष कुमार का कहना है कि निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया गया है और ग्रामीणों की मांग के आधार पर ही पुलिया निर्माण कराया गया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक पुलिया के निर्माण पर लगभग साढ़े चार लाख रुपये खर्च हुए हैं।
इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जहां न सड़क है और न नियमित आवागमन, वहां सरकारी राशि खर्च कर पुलिया निर्माण की आवश्यकता क्या थी। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले की जांच कराता है या नहीं।
हिमांशु की रिपोर्ट