Bihar News: परवान चढ़ी सिस्टम की अर्थी! वाह रे बिहार पुलिस! मृतक को एंबुलेंस तक नसीब नहीं, ठेले पर लादा गया शव, हो गया बवाल
Bihar News: बस की ठोकर से बाइक सवार एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद शव को अस्पताल भेजने के तरीके ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
Bihar News: वाह रे सिस्टम! तुम्हारी संवेदनहीनता की इंतहा देखकर लोगों का कलेजा मुंह को आ गया है। यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि बिहार के मोतिहारी जिला मुख्यालय से उठी वह दर्दनाक हकीकत है, जिसने इंसानियत को तार-तार कर रख दिया है। रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बस स्टैंड के पास घटी एक सड़क दुर्घटना ने प्रशासन के दावों और खोखले 'सिस्टम' की कलई खोलकर रख दी है।
घटना के मुताबिक, एक तेज रफ्तार बस ने मोटरसाइकिल सवार युवक को अपनी चपेट में ले लिया। मृतक की पहचान तुरकौलिया थाना क्षेत्र के मठवा गांव निवासी नथुनी साह के 22 वर्षीय होनहार पुत्र उमेश कुमार के रूप में हुई है। टक्कर इतनी भयानक थी कि उमेश ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस को जब्त कर चालक को गिरफ्तार तो कर लिया, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने खाकी और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर बदनुमा दाग लगा दिया।
जब घटनास्थल पर पुलिस पहुंची, तो उनके पास एक अदद एम्बुलेंस या शव वाहन की व्यवस्था करने की फुर्सत नहीं थी। इंसानियत को शर्मसार करते हुए पुलिस ने मृत उमेश के शव को एक मामूली ठेले पर लाद दिया और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल रवाना करने लगी। मोतिहारी की व्यस्त सड़कों पर जब एक गरीब के बेटे का शव ठेले पर आगे बढ़ रहा था, तो राहगीरों की आंखें नम थीं और जुबां पर बस यही अल्फाज थे-वाह रे हमारा सिस्टम, जहां मुर्दे को कफन तो दूर, आखिरी सफर के लिए दो गज नसीब वाली एम्बुलेंस भी नहीं मिलती।
जब परिजनों को इस हृदयविदारक घटना की खबर मिली, तो उनके घरों में कोहराम मच गया। बिलखते-चिंघाड़ते परिजन जब घटनास्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने अपने जिगर के टुकड़े को ठेले पर लाद-लाद कर ले जाते देखा। इस दृश्य को देखकर उनका आक्रोश फूट पड़ा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और उनका दर्द चीख-चीख कर पूछ रहा था कि क्या गरीबों की जिंदगी और मौत की इस देश में कोई कीमत नहीं है?
परिजनों और स्थानीय लोगों ने इस अमानवीय कृत्य का पुरजोर विरोध किया और ठेले को रोककर हंगामा खड़ा कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर मोतिहारी के प्रशासनिक अमले और स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। आखिर कब तक हमारे सिस्टम की बेरुखी ऐसे ही बेकसूरों की अर्थियों पर सवाल खड़े करती रहेगी? यह सवाल आज हर संवेदनशील नागरिक के दिल को झकझोर रहा है।
रिपोर्ट- हिमांशु कुमार