Bihar Flood: क्या जलसंसाधन विभाग की लापरवाही से टूटा रिंग बांध? रिसाव के बाद भी नहीं मिले बैग, तीन दर्जन गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

Bihar Flood: क्या मोतीहारी के अरेराज में जलसंसाधन विभाग की कथित लापरवाही ने सैकड़ों एकड़ फसल और दर्जनों गांवों को आफत में धकेल दिया? ..

क्या जलसंसाधन विभाग की लापरवाही से टूटा रिंग बांध? - फोटो : reporter

Bihar Flood: क्या मोतीहारी के अरेराज में जलसंसाधन विभाग की कथित लापरवाही ने सैकड़ों एकड़ फसल और दर्जनों गांवों को आफत में धकेल दिया? यह सवाल सरेया पंचायत के पांडेय टोला के पास रिंग बांध टूटने के बाद उठ रहा है। बताया जा रहा है कि अहले सुबह करीब तीन बजे रिंग बांध में अचानक कटाव हुआ और देखते ही देखते पानी आसपास के इलाकों में फैलने लगा। रिंग बांध टूटने से दो पंचायतों के दर्जनों गांवों के अलावा आसपास के कई इलाकों में भी बाढ़ का पानी दाखिल हो गया है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, रिंग बांध में बुधवार शाम से ही रिसाव शुरू हो गया था। ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन की ओर से जलसंसाधन विभाग से बचाव के लिए बैग उपलब्ध कराने की मांग की गई, लेकिन आरोप है कि विभाग ने बैग देने से इनकार कर दिया। इसके बाद रात में हालात बिगड़ते चले गए और सुबह बांध का हिस्सा टूट गया। अब सवाल यह है कि अगर वक्त रहते रिसाव की मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम किए जाते तो क्या यह आफत टाली जा सकती थी?

अरेराज सीओ विनोद कुमार पांडेय ने बताया कि मनरेगा से बने रिंग बांध में रिसाव की सूचना पर एसडीओ,डीएसपी ,बीडीओ सहित वहां पहुचे थे।जल संसाधन विभाग से लगातार रिंग बांध मरम्मती के लिए कहा जा रहा था ।लेकिन जल संसाधन विभाग बैग देने से इंकार कर दिया। िसके बाद भी ग्रामीणी अथक प्रयास करते रहे लेकिन सुबह सुबह होते होते बांध टूट गया।

रिंग बांध टूटने के बाद पानी की रफ्तार इतनी तेज रही कि सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई और करीब तीन दर्जन गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया। गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी के बीच मिश्रौलिया, चटिया बड़हरवा, सरेया, पिपरा, नगदहा और चटिया चितमनपुर पंचायत के कई गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं।

चटिया बड़हरवा पंचायत के वार्ड 1, 2 और 3, सरेया पंचायत के वार्ड 4, 3 और 2, मिश्रौलिया पंचायत के वार्ड 9, 10 और 7 तथा नवादा पंचायत के करीब आधा दर्जन वार्डों में पानी घुसने की बात सामने आई है। इसके अलावा पिपरा और नगदहा पंचायत के भी एक-एक वार्ड बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं।हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में तीन स्थानों पर सामुदायिक किचेन शुरू कराया है, ताकि बाढ़ की मार झेल रहे लोगों को भोजन मुहैया कराया जा सके।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शाम से ही रिंग बांध में रिसाव की खबर थी, तब रातभर इंतजाम क्यों नहीं किए गए? ग्रामीणों की गुहार पर बैग क्यों नहीं उपलब्ध कराए गए? और बांध टूटने के बाद हुए नुकसान की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही साफ होगा कि यह महज गंडक के बढ़ते जलस्तर का कहर था या समय रहते कार्रवाई नहीं होने से पैदा हुई बड़ी मुसीबत।

रिपोर्ट- हिमांश कुमार