Bihar News : मोतिहारी DEO कार्यालय का DM ने किया औचक निरीक्षण, गायब कर्मियों के वेतन में कटौती के दिए निर्देश
मोतीहारी डीएम सौरभ सुमन यादव ने जिला शिक्षा कार्यालय पहुचकर औचक निरीक्षण किया। डीएम के निरीक्षण में कई कर्मी अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए.....पढ़िए आगे
MOTIHARI : मोतिहारी के जिला पदाधिकारी सौरभ सुमन यादव, उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार और सहायक समाहर्ता राजकृष्ण झा ने संयुक्त रूप से जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस औचक कार्रवाई से पूरे कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सबसे पहले बायोमैट्रिक अटेंडेंस की बारीकी से जांच की और कार्यालय में तैनात एक-एक कर्मचारी का परिचय प्राप्त किया। इस दौरान जो भी कर्मी बिना किसी सूचना के अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए, उनके खिलाफ डीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्टीकरण जारी करने और वेतन कटौती करने का सख्त निर्देश दिया।
निरीक्षण के बाद डीएम सौरभ सुमन यादव ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को सख्त लहजे में निर्देश दिया कि सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मियों के सेवांत लाभ (रिटायरमेंट बेनिफिट्स) तथा एरियर भुगतान से जुड़े जितने भी मामले लंबित हैं, उनका निष्पादन हर हाल में एक महीने के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि इसके अलावा आम लोगों और शिक्षकों की शिकायतों से संबंधित जो भी मामले कार्यालय में लंबित हैं, उन्हें अगले 15 दिनों के अंदर दूर किया जाए। डीएम ने सुझाव दिया कि यदि मामलों की संख्या अधिक हो, तो इसके त्वरित निवारण के लिए विशेष कैंप का भी आयोजन किया जाए ताकि समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट निपटारा हो सके।
जिलाधिकारी ने जन शिकायत से संबंधित आवेदनों के प्रबंधन को लेकर भी नई व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि कार्यालय में आने वाले सभी आवेदनों का रखरखाव बेहद सुव्यवस्थित तरीके से किया जाना चाहिए और इसके लिए एक बकायदा लॉग बुक मेंटेन की जाए। इस लॉग बुक में यह स्पष्ट दर्ज होना चाहिए कि शिकायतकर्ता का आवेदन कब प्राप्त हुआ और उस पर किस तारीख को क्या कार्रवाई की गई। शिकायत निवारण के एक-एक स्टेप की डिजिटल या लिखित जानकारी सुरक्षित रखी जाए, जिससे नियमित रूप से इसकी समीक्षा की जा सके। यदि किसी भी स्तर पर फाइल लंबित पाई जाती है, तो संबंधित कर्मी या पदाधिकारी के विरुद्ध तुरंत दंडात्मक कार्रवाई होगी।
प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए डीएम ने निर्देश दिया कि सेवांत लाभ के मामलों के निष्पादन और प्राप्त शिकायतों पर की गई कार्रवाई की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। यह 'कृत कार्रवाई प्रतिवेदन' (एक्शन टेकन रिपोर्ट) अनिवार्य रूप से जिला गोपनीय प्रशाखा को नियमित अंतराल पर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि जिला स्तर से भी इसकी मॉनिटरिंग की जा सके। इस कदम से शिक्षा विभाग की कार्यशैली में जवाबदेही तय होगी और फाइलों को बेवजह दबाकर रखने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
अंत में, जिलाधिकारी ने अनुशासन और समयबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा विभाग में पदस्थापित सभी पदाधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से अपनी बायोमैट्रिक अटेंडेंस दर्ज करें। इस अटेंडेंस की उच्च स्तर पर रेगुलर बेसिस पर समीक्षा की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी कर्मचारी निर्धारित समय पर कार्यालय नहीं आते हैं, उनके विरुद्ध विभागीय नियमावली के अनुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों और छात्रों की समस्याओं को बेहद गंभीरता से लिया जाए और उनके समाधान में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हिमांशु की रिपोर्ट