Bihar Voter List Scam: वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का रेट कार्ड ! BLO और साइबर कैफे संचालक की मिलीभगत का भंडाफोड़, 200 रुपये में चल रहा था फर्जीवाड़े का धंधा
Bihar Voter List Scam: मतदाता सूची में नाम जोड़ने को लेकर बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
Bihar Voter List Scam: मतदाता सूची में नाम जोड़ने को लेकर बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी जिले में मतदाता सूची में नाम जोड़ने को लेकर बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाले इस मामले में एक बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और साइबर कैफे संचालक की कथित सांठगांठ सामने आई है। आरोप है कि दोनों मिलकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर रहे थे और इसके एवज में प्रति आवेदन 200 रुपये वसूल रहे थे।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अरेराज की डीसीएलआर सह हरसिद्धि विधानसभा निर्वाची पदाधिकारी इति चतुर्वेदी की नजर मतदाता सूची पोर्टल पर एक के बाद एक आ रहे आवेदनों पर पड़ी। लगातार बड़ी संख्या में ऑनलाइन आवेदन आने से मामला संदिग्ध लगा। प्रारंभिक जांच में पता चला कि आवेदन एक साइबर कैफे से किए जा रहे थे, लेकिन उसमें उपयोग बीएलओ की आधिकारिक आईडी का हो रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीएलआर ने हरसिद्धि के बीडीओ गुलशन कुमार को जांच का निर्देश दिया। जांच आगे बढ़ी तो परत-दर-परत पूरा खेल खुलता चला गया। जांच में सामने आया कि हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या-96 के बीएलओ मस्जिद बैठा की आईडी का इस्तेमाल साइबर कैफे संचालक उपेंद्र कुमार कर रहा था। पूछताछ में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आने वाले प्रत्येक आवेदन पर 200 रुपये लिए जाते थे। आरोप है कि इसमें 100 रुपये बीएलओ को और 100 रुपये साइबर कैफे संचालक को दिए जाते थे। यानी सरकारी प्रक्रिया को निजी कमाई का जरिया बनाकर वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। डीसीएलआर के निर्देश पर बीडीओ गुलशन कुमार ने हरसिद्धि थाना में बीएलओ मस्जिद बैठा और साइबर कैफे संचालक उपेंद्र कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि यदि समय रहते यह खेल पकड़ में नहीं आता तो मतदाता सूची में कितने और नाम संदिग्ध तरीके से जोड़े जाते। फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की गहन जांच में जुटे हैं। यह भी खंगाला जा रहा है कि इस कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कितने आवेदन इस तरीके से किए गए। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और चुनावी प्रक्रिया से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
रिपोर्ट- हिमांशु कुमार