Bihar news:मुंगेर सदर अस्पताल के सामने महिला ने दिया बच्चे को जन्म, अस्पताल की तत्परता से जच्चा-बच्चा सुरक्षित

Bihar news:नीतीश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत, जवाबदेह और इंसानी जज़्बे से भरपूर बनाने की जो रणनीति बनाई गई है, उसकी झलक मुंगेर सदर अस्पताल में सामने आए ताज़ा वाकये में साफ़ दिखाई दी।

अस्पताल के सामने बच्चे का जन्म - फोटो : IMTIYAZ

Munger: बिहार की सियासत में अक्सर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की तल्ख़ी देखने को मिलती रही है, लेकिन अब सरकार के दावों की ज़मीन पर सच्चाई बनकर उतरती नज़र आ रही है। नीतीश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत, जवाबदेह और इंसानी जज़्बे से भरपूर बनाने की जो रणनीति बनाई गई है, उसकी झलक मुंगेर सदर अस्पताल में सामने आए ताज़ा वाकये में साफ़ दिखाई दी।

मामला मुंगेर जिले के तौफीर गांव की रहने वाली कविता कुमारी का है, जिनके शौहर लालू कुमार हैं। अचानक प्रसव पीड़ा उठने पर परिजन उन्हें ई-रिक्शा से सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन किस्मत का इम्तिहान उस वक्त सामने आया, जब इमरजेंसी वार्ड के पास पहुंचते ही कविता कुमारी ने ई-रिक्शा पर ही नवजात को जन्म दे दिया। यह पल किसी भी परिवार के लिए दहशत और अफरा-तफरी का सबब बन सकता था, लेकिन यहीं से सिस्टम की संवेदनशीलता और सरकारी मशीनरी की मुस्तैदी ने मोर्चा संभाल लिया।

सूचना मिलते ही इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर रमण और नर्स अनु समेत पूरा मेडिकल अमला फौरन मौके पर पहुंचा। बिना किसी लापरवाही या देरी के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने हालात को काबू में लिया और सुरक्षित ढंग से डिलीवरी की प्रक्रिया पूरी कराई। इसके बाद जच्चा और बच्चा दोनों को डिलीवरी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों के मुताबिक दोनों की हालत पूरी तरह स्थिर है।

यह घटना महज़ एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि बिहार सरकार की उस सियासी सोच का आईना है, जिसमें सरकारी अस्पतालों को मज़बूत करने, डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने और स्वास्थ्य सेवाओं को मानवीय बनाने पर ज़ोर दिया गया है। डॉक्टर रमण ने भी साफ़ कहा कि ऐसे आपात हालात अक्सर सामने आते हैं और अस्पताल प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहता है। कुल मिलाकर, मुंगेर सदर अस्पताल का यह वाकया विपक्ष के तमाम सवालों के बीच सरकार के लिए एक सियासी जवाब बनकर उभरा है। यह साबित करता है कि अगर नीयत साफ़ हो और सिस्टम मुस्तैद हो, तो सरकारी अस्पताल भी भरोसे की सियासत का मजबूत स्तंभ बन सकते हैं।

रिपोर्ट- मो. इम्तियाज खान