बोल बम की राह पर आस्था की अद्भुत तस्वीर, कहीं दो माह की बेटी संग दंडवत यात्रा, तो कहीं 9 साल की बच्ची ने उठाई कांवड़
Bihar Kanwar Yatra: एक ओर पिता अपनी महज दो माह की मासूम बेटी को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर महज नौ साल की बच्ची खुद कांवड़ उठाकर परिवार की खुशहाली के लिए बाबा धाम की कठिन राह नाप रही है।...
Munger: श्रावणी मेले में मुंगेर के 26 किलोमीटर लंबे कच्ची कांवरिया पथ पर इन दिनों लाखों शिवभक्त "बोल बम" के जयघोष के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। श्रद्धालुओं की इस अथाह भीड़ के बीच कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आ रही हैं, जो सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि समर्पण, विश्वास और बेटियों के सम्मान का भी अनोखा पैगाम दे रही हैं। एक ओर पिता अपनी महज दो माह की मासूम बेटी को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर महज नौ साल की बच्ची खुद कांवड़ उठाकर परिवार की खुशहाली के लिए बाबा धाम की कठिन राह नाप रही है।
मुजफ्फरपुर निवासी मिथिलेश कुमार की श्रद्धा इन दिनों कांवरिया पथ पर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। उन्होंने अपनी दो माह की नन्ही बेटी को फूलों से सजी डोली में बैठाया है और खुद दंडवत करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। जहां-जहां से यह दृश्य गुजरता है, श्रद्धालु ठहरकर इस अनोखी शिवभक्ति को निहारते हैं।
मिथिलेश बताते हैं कि पिछले वर्ष बाबा बैद्यनाथ धाम में उन्होंने भोलेनाथ से मन्नत मांगी थी कि यदि उनके घर बेटी का जन्म होगा, तो अगली बार उसी बेटी को साथ लेकर दंडवत यात्रा करेंगे। भोलेनाथ की कृपा से इस वर्ष उनके घर लक्ष्मी आई और अब वह अपना संकल्प पूरा कर रहे हैं। खास बात यह है कि मासूम बच्ची की सुविधा का पूरा ख्याल रखा गया है। डोली में पंखा, लाइट, सोलर ऊर्जा से चलने वाली व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं, ताकि यात्रा के दौरान उसे कोई तकलीफ न हो। यह दृश्य आस्था के साथ-साथ 'बेटी सम्मान' का भी खूबसूरत संदेश दे रहा है।
वहीं दूसरी प्रेरणादायक कहानी गंगा नगरी वाराणसी से आए गणेश कन्नौजिया के परिवार की है। यह परिवार पिछले दस वर्षों से लगातार बाबा धाम की कांवड़ यात्रा कर रहा है। इस बार उनकी 9 वर्षीय बेटी रागनी ने खुद अपने कंधों पर कांवड़ उठाकर करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की है।
रागनी पूरे उत्साह के साथ कहती है कि बाबा धाम की यात्रा उसे बेहद आनंद देती है और वह अपने परिवार की सुख-शांति व समृद्धि के लिए यह कठिन सफर तय कर रही है। पिता गणेश कन्नौजिया बताते हैं कि रागनी कई वर्षों से उनके साथ यात्रा में शामिल होती रही है, लेकिन इस बार उसने खुद कांवड़ उठाने की जिद की और पूरे जोश के साथ यात्रा पर निकल पड़ी।
श्रावणी मेले में हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी-अपनी मनोकामनाओं और अटूट विश्वास के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं, लेकिन इन दोनों तस्वीरों ने शिवभक्ति को एक नई पहचान दी है। एक तरफ पिता अपनी नवजात बेटी को भगवान शिव का आशीर्वाद मानकर कठिन दंडवत यात्रा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर एक मासूम बच्ची परिवार की खुशहाली के लिए कांवड़ उठाकर श्रद्धा की मिसाल पेश कर रही है। यही अटूट आस्था, यही समर्पण और यही 'बोल बम' की असली पहचान है।
रिपोर्ट- मो. इम्तियाज खान