श्रावणी मेला: कोलकाता से आए भक्तों की टोली 170 किलो का कांवड़ उठाकर देवघर रवाना, अनोखे कांवड़ियों को देखने उमड़ी भीड़

अनोखे कांवड़ियों को देखने उमड़ी भीड़- फोटो : इम्तियाज खान

Munger : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में हर साल बाबा भोलेनाथ के ऐसे-ऐसे भक्त देखने को मिलते हैं, जिनकी कठिन साधना और अगाध श्रद्धा हर किसी को आश्चर्यचकित कर देती है। कोई सैकड़ों किलोमीटर की दंडवत यात्रा करता है, तो कोई भारी-भरकम वजन उठाकर बाबा धाम की ओर कदम बढ़ाता है। इस बार भी मुंगेर के कच्ची कांवड़िया पथ पर आस्था का एक अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है, जहाँ कोलकाता से आए कांवड़ियों के अनोखे जत्थे श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।


100 किलो के 'अर्धनारीश्वर' स्वरूप को कंधों पर उठाकर बढ़ रहा पहला जत्था

पहला जत्था पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित लेक टाउन से आया है। 'श्री श्री बाबा नंदेश्वर महाराज संघ' के करीब 20 कांवड़ियों का यह दल सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल भरकर बाबा धाम (देवघर) की ओर बढ़ रहा है। ये श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती के 'अर्धनारीश्वर' स्वरूप की आदमकद प्रतिमा को कांवड़ का रूप देकर अपने कंधों पर उठाए हुए हैं। थर्मोकोल, प्लाई, बांस और आकर्षक लाइटों से सजी इस 100 किलो वजनी प्रतिमा को तैयार करने में करीब दो महीने का समय लगा है।


'बाबा की कृपा से हल्का लगता है 100 किलो का भार': संघ प्रमुख मोनू सिंह

कांवड़िया संघ का नेतृत्व कर रहे मोनू सिंह ने बताया कि उनका संघ हर साल अलग-अलग अनोखी थीम पर विशाल कांवड़ तैयार कर बाबा धाम की यात्रा पर निकलता है। उन्होंने कहा, "चार कांवड़िए एक साथ बारी-बारी से इस भारी कांवड़ को उठाते हैं। यह सब बाबा भोलेनाथ की असीम कृपा और भक्ति की शक्ति है, जिसके आगे 100 किलो का भार भी बिल्कुल हल्का महसूस होता है।"


कोलकाता के दूसरे जत्थे ने उठाया 170 किलो वजनी शिव-पार्वती का कांवड़

वहीं, कोलकाता से ही आए 45 कांवड़ियों का दूसरा दल भी अपनी अनूठी भक्ति से सभी को मंत्रमुग्ध कर रहा है। इस संघ ने करीब 170 किलो वजनी भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की दिव्य आदमकद प्रतिमा को कांवड़ का रूप दिया है। संघ के सदस्य भरत साह ने बताया कि वे कई वर्षों से हर सावन में इसी तरह की भारी-भरकम और आकर्षक कांवड़ लेकर सुल्तानगंज से देवघर की 105 किलोमीटर लंबी कठिन पैदल यात्रा पूरी करते हैं।


कच्ची कांवड़िया पथ पर गूंजा 'बोल-बम', भक्तों का उत्साह चरम पर

कांवड़िया भरत साह का कहना है कि यह कोई शारीरिक वजन नहीं, बल्कि बाबा के प्रति उनका अटूट विश्वास है, जो उन्हें बिना किसी थकावट के मंजिल तक पहुंचा देता है। मुंगेर के कच्ची कांवड़िया पथ पर इन दोनों कांवड़िया संघों को देखने के लिए स्थानीय लोगों और अन्य श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है। 'बोल-बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा इलाका गुंजायमान है।


इम्तियाज की रिपोर्ट