Bihar Shelter Home Scam: बाल गृह फरारी कांड ने बढ़ाई पुलिस की टेंशन, 4 बच्चे अब भी गायब, पुलिस के हाथ अब भी खाली, पढ़िए मिस्ट्री गेम

Bihar Shelter Home Scam: जिस फरारी कांड ने पूरे सिस्टम को हिला दिया था, उसे अब 7 दिन बीत चुके हैं, लेकिन 10 में से 4 बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। ...

बाल गृह से फरार बच्चों का मिस्ट्री गेम- फोटो : reporter

Bihar Shelter Home Scam:  मुजफ्फरपुर का नरौली बाल गृह इन दिनों एक गहरी पहेली और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस फरारी कांड ने पूरे सिस्टम को हिला दिया था, उसे अब 7 दिन बीत चुके हैं, लेकिन 10 में से 4 बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। यह मामला अब सिर्फ फरारी नहीं, बल्कि रहस्य और चिंता दोनों का बड़ा विषय बन चुका है।

घटना बीते रविवार की रात की है, जब बाल गृह की खिड़की तोड़कर और मेन ग्रिल फांदकर एक साथ 10 बच्चे फरार हो गए थे। जैसे ही मामला सामने आया, पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम बनाई गई और ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू हुई।

पुलिस की तत्परता से 6 बच्चों को समस्तीपुर जिले के अलग-अलग इलाकों से सकुशल बरामद कर लिया गया, लेकिन बाकी 4 बच्चे जैसे मानो हवा में गायब हो गए हों। उनकी कोई लोकेशन, कोई सुराग, कोई ठोस जानकारी अब तक सामने नहीं आई है।

संभावना जताई जा रही है कि ये बच्चे नेपाल की तरफ जा सकते हैं, जिसके चलते SSB को भी अलर्ट कर दिया गया है और सीमा क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। हर आने-जाने वाले रास्ते पर पुलिस की नजर टिकी हुई है, लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है।

इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई भी तेज हुई है। समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने सख्त रुख अपनाते हुए बाल गृह के सुपरिटेंडेंट अविनाश डे, गृह फादर और 5 होमगार्ड जवानों को तत्काल सस्पेंड कर दिया है। वहीं जिला जज ने भी बाल गृह का दौरा कर बच्चों से बातचीत की है।

घटना के बाद जिस ग्रिल से बच्चे फरार हुए थे, उसकी ऊंचाई बढ़ा दी गई है और ऊपर कांटेदार तार लगाए जा रहे हैं। लेकिन सवाल अब भी वही है कि आखिर सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?

एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा का कहना है कि 6 बच्चों को बरामद कर लिया गया है और बाकी 4 की तलाश तेज कर दी गई है। जैसे ही सभी बच्चे मिलेंगे, उनसे पूछताछ कर फरारी की असली वजह सामने लाई जाएगी। फिलहाल यह मामला सिर्फ बाल गृह की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा है।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा