Muzaffarpur Blast: मुजफ्फरपुर गोबरसही ब्लास्ट की जांच को पहुंची दिल्ली से केंद्रीय टीम, 30 दिन में आएगी रिपोर्ट

Muzaffarpur Blast: मुजफ्फरपुर जिले के गोबरसही में हुए भीषण ब्लास्ट हादसे की गुत्थी सुलझाने के लिए अब केंद्रीय स्तर पर जांच तेज हो गई है।

मुजफ्फरपुर गोबरसही ब्लास्ट की जांच को पहुंची दिल्ली से केंद्रीय टीम- फोटो : reporter

Muzaffarpur Blast: मुजफ्फरपुर जिले के गोबरसही में हुए भीषण ब्लास्ट हादसे की गुत्थी सुलझाने के लिए अब केंद्रीय स्तर पर जांच तेज हो गई है। हादसे के वास्तविक कारणों और संभावित विभागीय लापरवाही का पता लगाने के लिए नई दिल्ली से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड की चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम गुरुवार को मुजफ्फरपुर पहुंची। बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर विजय कुमार और अर्पित जौहरी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाने के साथ स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए।

जांच का मुख्य फोकस एलपीजी गैस रिसाव, सिलेंडरों में कथित अवैध रीफिलिंग, पीएनजी पाइपलाइन की सुरक्षा और सड़क निर्माण के दौरान हुई खुदाई पर है। पुलिस प्रशासन की पहल पर केंद्रीय विशेषज्ञों को जांच में शामिल किया गया है, ताकि तकनीकी तथ्यों के आधार पर हादसे की असली वजह सामने आ सके।

मकान में मिले 15 से 20 सिलेंडर, अवैध रीफिलिंग का भी शक

जांच के शुरुआती चरण में एक अहम जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि ब्लास्ट वाले स्थान के समीप स्थित एक मकान में 15 से 20 एलपीजी सिलेंडर रखे हुए थे। वहां छोटे सिलेंडरों में अनधिकृत तरीके से गैस रीफिलिंग किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।विशेषज्ञों को संदेह है कि गैस रिसाव अथवा रीफिलिंग की प्रक्रिया के दौरान निकली मामूली चिंगारी भीषण विस्फोट की वजह बन सकती है। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।दूसरी ओर, मकान मालिकों का कहना है कि घर में शादी समारोह आयोजित होने वाला था। इसी वजह से बड़ी संख्या में सिलेंडर एकत्र करके रखे गए थे। केंद्रीय टीम दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल कर रही है। मौके पर उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सिलेंडर किस उद्देश्य से रखे गए थे और वहां गैस रीफिलिंग का काम हो रहा था या नहीं।

पीएनजी पाइपलाइन और सड़क विभाग की भूमिका भी जांच के घेरे में

गोबरसही हादसे की जांच अब एलपीजी सिलेंडरों तक सीमित नहीं रह गई है। विशेषज्ञ टीम पीएनजी यानी पाइपलाइन नेचुरल गैस की आपूर्ति के लिए बिछाई गई पाइपलाइन और उसकी सुरक्षा व्यवस्था की भी पड़ताल कर रही है।इसके साथ ही सड़क निर्माण विभाग (RCD) की भूमिका की भी जांच की जा रही है। टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि सड़क की खुदाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों और तकनीकी प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं। खुदाई के कारण पाइपलाइन को कोई नुकसान पहुंचा था या नहीं और हादसे के समय गैस रिसाव की स्थिति क्या थी, इन सभी बिंदुओं पर तकनीकी जांच की जा रही है।घटना से जुड़े विभिन्न वीडियो फुटेज भी साक्ष्य के तौर पर एकत्र किए गए हैं। इनकी मदद से विस्फोट से पहले और बाद की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया जाएगा।

एसएसपी से मिली केंद्रीय टीम, केस डायरी में शामिल होगी रिपोर्ट

गुरुवार देर शाम केंद्रीय जांच टीम ने मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्र से मुलाकात की और पहले दिन की जांच की प्रगति से उन्हें अवगत कराया। एसएसपी के आधिकारिक पत्र और अनुरोध के आधार पर ही PNGRB की विशेषज्ञ टीम को मुजफ्फरपुर बुलाया गया है।एसएसपी के मुताबिक, केंद्रीय टीम सात दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं, 30 दिनों के अंदर विस्तृत तकनीकी जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी। इस रिपोर्ट को पुलिस की केस डायरी यानी कांड दैनिकी का हिस्सा बनाया जाएगा।

तकनीकी जांच से खुलेगा हादसे का राज

गोबरसही ब्लास्ट के बाद अब लोगों की निगाहें केंद्रीय टीम की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसे के पीछे एलपीजी सिलेंडर से गैस रिसाव, कथित अवैध रीफिलिंग, पीएनजी पाइपलाइन में तकनीकी गड़बड़ी या सड़क खुदाई के दौरान हुई लापरवाही में से कौन-सा कारण जिम्मेदार था।साथ ही, यदि किसी विभाग, एजेंसी या संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसकी जवाबदेही तय करने में भी तकनीकी रिपोर्ट अहम भूमिका निभाएगी। फिलहाल जांच जारी है और किसी एक कारण को हादसे की वजह मानने से पहले विशेषज्ञों की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।