Bihar Crime:मुजफ्फरपुर में खुलेआम हो रही ब्लैक मार्केटिंग, डाला जा रहा गरीबों के हक पर डाका, पढ़िए एफसीआई अनाज की कालाबाजारी का सच
Bihar Crime: विडंबना यह है कि व्यवस्था के गलियारों में बैठे कुछ लालची दलाल और मुनाफाखोर गरीबों के हक को दीमक की तरह चट कर रहे हैं। ...
Bihar Crime: केंद्र सरकार द्वारा देश के गरीब, वंचित और जरूरतमंद अवाम के भरण-पोषण और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के वास्ते जन वितरण प्रणाली के माध्यम से मुफ्त या रियायती दरों पर अन्न मुहैया कराया जाता है। हुकूमत की इस कल्याणकारी योजना का मकसद यह है कि समाज के आखिरी पायदान पर खड़े शख्स तक निवाला पहुँच सके। किंतु, विडंबना यह है कि व्यवस्था के गलियारों में बैठे कुछ लालची दलाल और मुनाफाखोर इस नेक मकसद को दीमक की तरह चट कर रहे हैं। गरीबों के हक के इस पवित्र अनाज की धड़ल्ले से कालाबाजारी की जा रही है, और ताज्जुब की बात यह है कि जिला प्रशासन इस संगीन जुर्म से पूरी तरह अंजान और बेखबर बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और जीपीएस निगरानी के नियमों की धज्जियाँ
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो बड़ी रफ्तार से वायरल हो रहा है, जिसने सरकारी तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि भारतीय खाद्य निगम के सरकारी अनाज से लदा एक ट्रक बीच रास्ते में खड़ा है और उससे अनाज निकालकर किसी दूसरी गाड़ी पर अनलोड किया जा रहा है।
सरकारी कायदों और नियमों के मुताबिक, जब नारायणपुर के एफसीआई गोदाम से सरकारी अनाज किसी प्रखंड गोदाम के लिए रवाना होता है, तो उस ट्रक में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगा होता है। नारायणपुर गोदाम से निकलने के बाद उस ट्रक का एक निश्चित रूट तय होता है, जिसके जरिए उस सरकारी अनाज से लदे वाहन को सीधे प्रखंड कार्यालय स्थित गोदाम तक पहुँचना होता है। अगर कोई तकनीकी खराबी या आपात स्थिति आ जाए, तो इसकी सूचना संबंधित विभाग के आला अधिकारियों को देनी होती है। इसके बाद, कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी दूसरे वाहन पर अनाज शिफ्ट किया जा सकता है। मगर यहाँ इन तमाम कायदे-कानूनों को ताक पर रख दिया गया।
पुलिसिया कार्रवाई और आपूर्ति पदाधिकारी की भूमिका पर संगीन सवाल
सूत्रों और जानकारी के अनुसार, जब ट्रक से सरकारी अनाज को उतारकर दूसरे वाहन पर लादा जा रहा था, तब पानापुर ओपी थाने की पुलिस मौके पर पहुँचती है और ट्रक को अपने कब्जे में लेकर थाने ले आती है। इसके बाद, पानापुर पुलिस द्वारा मीनापुर के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी से इस पूरे मामले में कागजात और गंतव्य की जानकारी माँगी जाती है। हैरानगी की बात यह है कि मीनापुर प्रखंड के आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा उस वाहन को बिना किसी ठोस तहकीकात के क्लीन चिट दे दी जाती है।
अब ऐसे में कई संगीन सवाल सिर उठाने लगे हैं कि जब वीडियो में साफ दिख रहा है कि ट्रक से सरकारी अनाज किसी अन्य वाहन पर उतारा जा रहा था, तो फिर जप्त किए जाने के बाद उस ट्रक पर लोड अनाज पूरा कैसे पाया गया?सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी अनाज से लदे उस जप्त ट्रक को थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की नजर से दूर क्यों खड़ा किया गया? ट्रक और माल की हिफाजत के लिए पुलिस द्वारा किसी चौकीदार की तैनाती क्यों नहीं की गई?ये तमाम पहलू स्थानीय पुलिस और आपूर्ति विभाग की मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं।
जिला प्रशासन की कार्रवाई और भविष्य का रुख
इस संगीन मामले के उजागर होने के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिले के वरीय पदाधिकारी इस प्रकरण पर क्या कदम उठाते हैं। क्या इस गंभीर घोटाले की निष्पक्ष जाँच होगी या फिर लीपापोती कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी ने इस सनसनीखेज मामले का खुद संज्ञान लिया है और एक उच्चस्तरीय जाँच कमेटी गठित कर सख्त तहकीकात का हुक्म जारी कर दिया है। गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाले इन सौदागरों पर शिकंजा कसना बेहद जरूरी है, ताकि आम अवाम का प्रशासनिक व्यवस्था से भरोसा न उठे।
रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा