Bihar News: मुजफ्फरपुर के इस मंदिर में दीपावली पर उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब, रात 2 बजे तक बंटेगा महाप्रसाद

Bihar News:दीपावली के पावन अवसर पर मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्राचीन लक्ष्मी-गणेश मंदिर में इस बार भी श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।

दीपावली पर उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब- फोटो : social Media

Bihar News:दीपावली के पावन अवसर पर मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्राचीन लक्ष्मी-गणेश मंदिर में इस बार भी श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। लक्ष्मी चौक स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। दीपों के त्योहार पर मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहेगा। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के दर्शन, पूजन और मन्नत मांगने के लिए न सिर्फ मुजफ्फरपुर, बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचेंगे। मंदिर की खासियत है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई मुराद पूरी होने की मान्यता भक्तों के बीच गहरी आस्था का केंद्र बनी हुई है।

कई क्विंटल घी के लड्डुओं का लगेगा महाभोग

दीपावली को लेकर मंदिर प्रबंधन ने पूजा-अर्चना, भव्य सजावट और महाप्रसाद वितरण की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मंदिर समिति के मुताबिक, दीपावली की रात माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को कई क्विंटल घी से तैयार लड्डुओं का महाभोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण होगा। पूजा शाम 6 बजे से शुरू होगी, जबकि रात 8 बजे से प्रसाद वितरण का सिलसिला आरंभ होगा। यह कार्यक्रम रात करीब 2 बजे तक चलेगा।

1921 में महामारी से मुक्ति की कामना के साथ हुई थी स्थापना

इस मंदिर का इतिहास बेहद दिलचस्प और आस्था से जुड़ा हुआ है। मंदिर की स्थापना वर्ष 1921 में हुई थी। उस दौर में जिले में महामारी का प्रकोप फैला हुआ था। बीमारी और मौत के खौफ से लोग परेशान थे। इसी बीच कुछ साधु यहां पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों को माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करने की सलाह दी। इसके बाद लोगों ने मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित कीं और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना शुरू की।स्थानीय पुरोहित के मुताबिक, पूजा शुरू होने के बाद महामारी का प्रभाव कम हुआ। इसके बाद लोगों की श्रद्धा इस मंदिर से जुड़ती चली गई। धीरे-धीरे मंदिर की ख्याति मुजफ्फरपुर से निकलकर उत्तर बिहार के दूसरे इलाकों तक फैल गई।

विनोबा भावे ने किया था मंदिर का शिलान्यास

शुरुआती दौर में हर साल दीपावली पर मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित की जाती थीं। पूजा संपन्न होने के बाद उनका विसर्जन कर दिया जाता था। मंदिर के इतिहास में एक अहम पड़ाव तब आया, जब आचार्य विनोबा भावे ने इसके निर्माण का शिलान्यास किया। इसके बाद मंदिर की धार्मिक पहचान और मजबूत होती चली गई।वर्ष 2012 में मंदिर में पत्थर की स्थायी प्रतिमाएं स्थापित की गईं। तब से उन्हीं प्रतिमाओं की नियमित पूजा होती आ रही है।

मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं प्रसाद, उमड़ता है आस्था का जनसैलाब

मंदिर के पुरोहित के अनुसार, यहां सच्चे मन से माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के समक्ष मन्नत मांगने वाले श्रद्धालु अपनी इच्छा पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाते हैं। यही अटूट विश्वास इस मंदिर को खास पहचान देता है। दीपावली पर यहां उमड़ने वाली भीड़ इसी लोकआस्था और धार्मिक परंपरा की मिसाल है।इस बार भी मंदिर समिति श्रद्धालुओं की सुविधा और पूजा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद है। दीपों की रोशनी, भक्ति के गीत, लड्डुओं का महाभोग और देर रात तक महाप्रसाद वितरण के बीच लक्ष्मी चौक का यह प्राचीन मंदिर दीपावली पर उत्तर बिहार के प्रमुख धार्मिक आकर्षणों में शामिल रहेगा।