Bihar News: स्टीयरिंग थामे हाथों की हुंकार, हक के लिए सड़क से मैदान तक उतरे ड्राइवर, सरकार को दी चेतावनी

Bihar News:कमर्शियल लाइसेंसधारी चालकों ने एकजुट होकर एकदिवसीय धरना दिया और अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के सामने सख्त पैगाम भेजा।

ड्राइवरों की हड़ताल - फोटो : RAJ

Nalanda:  जिले में सोमवार को ड्राइवरों की आवाज़ बुलंद होती दिखाई दी। बिहार शरीफ के श्रम कल्याण केंद्र के मैदान में जिले भर से आए सैकड़ों कमर्शियल लाइसेंसधारी चालकों ने एकजुट होकर एकदिवसीय धरना दिया और अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के सामने सख्त पैगाम भेजा। स्टीयरिंग पकड़कर सड़कों पर जिंदगी गुजारने वाले इन चालकों ने साफ कहा कि अब उनके हक और सम्मान की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

धरना स्थल पर माहौल कुछ ऐसा था जैसे मेहनतकश ड्राइवर अपने दर्द और गुस्से की पूरी दास्तान बयान करने आए हों। संघ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की गाड़ी चलाने वाले चालक खुद ही उपेक्षा और असुरक्षा के शिकार हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि सड़क हादसों में ड्राइवर की मौत को “आपदा” की श्रेणी में रखा जाए और चालकों को “द्वितीय श्रेणी सैनिक” का दर्जा दिया जाए। धरने के दौरान चालकों ने यह भी कहा कि सड़क पर उनकी पहचान और अनुशासन मजबूत करने के लिए यूनिफॉर्म अनिवार्य किया जाए। उनका कहना था कि जब तक ड्राइवरों की एक अलग और सम्मानित पहचान नहीं बनेगी, तब तक समाज का नजरिया भी नहीं बदलेगा।

संघ ने सरकार से ड्राइवर आयोग और ड्राइवर वेलफेयर फंड के गठन की जोरदार मांग उठाई। साथ ही सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी कई अहम मांगें सामने रखी गईं। चालकों ने कहा कि यदि किसी सड़क दुर्घटना में ड्राइवर की मौत होती है तो उसके परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा मिले, जबकि अपंग होने की स्थिति में 10 लाख रुपये की सहायता दी जाए। घायल चालकों के लिए मुफ्त इलाज और 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन योजना लागू करने की भी मांग की गई।

सुरक्षा के मुद्दे पर भी चालकों ने कड़ा रुख अपनाया। उनका कहना है कि अक्सर सड़क पर उनके साथ मारपीट और बदसलूकी की घटनाएं होती रहती हैं। इसे रोकने के लिए एक विशेष “ड्राइवर सुरक्षा कानून” बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा गाड़ियों में आगे और पीछे छह कैमरे लगाने की मांग भी उठाई गई, ताकि किसी दुर्घटना की निष्पक्ष जांच हो सके और बेगुनाह ड्राइवरों को परेशान न किया जाए।

धरने में यह भी मांग उठी कि 1 सितंबर को आधिकारिक तौर पर “ड्राइवर दिवस” घोषित किया जाए, ताकि साल में एक दिन चालक भी सम्मान और सुकून के साथ अपनी जिंदगी का जश्न मना सकें। साथ ही सरकारी अस्पतालों के आईसीयू में ड्राइवरों के लिए एक बेड आरक्षित करने और उनके बच्चों को उच्च शिक्षा में विशेष आरक्षण देने की मांग भी जोर-शोर से रखी गई। धरना कार्यक्रम में संघ के सचिव कुणाल कुमार, उदय प्रसाद, इंदल बिंद, उपेंद्र यादव और जितेंद्र कुमार यादव समेत बड़ी संख्या में चालक मौजूद रहे। मैदान में गूंजती आवाज़ें साफ इशारा कर रही थीं अब ड्राइवर अपने हक की लड़ाई स्टीयरिंग से उतरकर सड़क और मंच दोनों जगह लड़ने को तैयार हैं।

रिपोर्ट- राज पाण्डेय