नवादा में UGC एक्ट और SC/ST कानून के खिलाफ फूटा सवर्ण समाज का गुस्सा, किया उग्र प्रदर्शन

नवादा जिले में गुरुवार को सवर्ण समाज द्वारा UGC एक्ट के विरोध में जोरदार आक्रोश मार्च निकाला गया। इस दौरान नेताओं ने SC/ST एक्ट को तुरंत वापस लेने और इसके दुरुपयोग पर स्थायी रोक लगाने की जोरदार मांग की....

UGC एक्ट और SC/ST कानून के खिलाफ सवर्ण समाज का प्रदर्शन- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : जिले में सवर्ण समाज ने UGC एक्ट के विरोध में जोरदार आक्रोश मार्च निकाला। अखिल भारतीय सम्मान जाति संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और शहर के मुख्य चौराहे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।


मांगों को लेकर उग्र हुए प्रदर्शनकारी 

इस आक्रोश मार्च का कुशल संयोजन राजेश कुमार श्री और सह-संयोजन मनीष कुमार सिन्हा द्वारा किया गया। मार्च के दौरान नेताओं ने SC/ST एक्ट को तुरंत वापस लेने और इसके दुरुपयोग पर स्थायी रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय सवर्ण आयोग के जल्द गठन और वर्तमान आरक्षण नीति में समीक्षात्मक बदलाव की जोरदार मांग बुलंद की।


सवर्ण समाज के नेताओं और सांसदों पर साधा निशाना 

आंदोलन के दौरान सवर्ण समाज के नेताओं ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, रविशंकर प्रसाद सहित स्थानीय सांसदों पर निष्क्रियता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान और जीतन राम मांझी अपनी-अपनी जातियों के हितों के लिए लगातार मुखर हैं, जबकि सवर्ण समाज के प्रतिनिधि पूरी तरह खामोश बैठे हैं। नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आगामी चुनावों में इन जनप्रतिनिधियों को सबक सिखाया जाएगा।


भाजपा कार्यकर्ताओं पर बाधा डालने का आरोप 

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद उन्होंने साफ किया कि अधिकार मिलने तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक बिल वापस नहीं लिया जाता, तब तक चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन जारी रहेगा।


सुरक्षा के लिहाज से नवादा में कड़े इंतजाम 

विरोध प्रदर्शन और संभावित तनाव को देखते हुए नवादा जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। शहर की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 20 संवेदनशील स्थानों पर पुलिस अधिकारियों और दंडाधिकारियों की मुस्तैदी से तैनाती की गई थी। प्रशासनिक सतर्कता के कारण आक्रोश मार्च के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और स्थिति नियंत्रण में रही।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट