बिहार से शुरू हुई 'क्रांति' अब पहुंची दक्षिण भारत! कोचिंग संस्थानों के लिए जारी हुआ 'फरमान', बदल जाएगा छात्रों का भविष्य

आंध्र प्रदेश सरकार ने केके पाठक मॉडल की तर्ज पर कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियम लागू करने का निर्णय लिया है, जिसमें स्कूल समय में कोचिंग पर रोक और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया गया है।

Patna - बिहार के शिक्षा विभाग के पूर्व अपर मुख्य सचिव (ACS) केके पाठक द्वारा कोचिंग संस्थानों को लेकर लागू किए गए कड़े नियमों की गूंज अब आंध्र प्रदेश में सुनाई दे रही है। आंध्र प्रदेश सरकार ने 'कोचिंग संस्थान (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2026' का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जो छात्रों के शैक्षणिक दबाव को कम करने और उनके मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 

केके पाठक मॉडल की आंध्र प्रदेश में दस्तक

बिहार में केके पाठक ने स्कूल अवधि के दौरान कोचिंग संचालन पर रोक लगाने का ऐतिहासिक आदेश दिया था, जिसे अब आंध्र प्रदेश सरकार ने भी अपने नए नियमों में शामिल किया है। राज्य के मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक करते हुए आम जनता से सुझाव मांगे हैं। सरकार का उद्देश्य निजी कोचिंग संस्थानों की बेलगाम गतिविधियों पर अंकुश लगाना और छात्रों के लिए एक सुरक्षित व तनावमुक्त वातावरण तैयार करना है। 

स्कूल समय में कोचिंग पर पूर्ण प्रतिबंध

नए ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, मान्यता प्राप्त स्कूलों या जूनियर कॉलेजों के निर्धारित समय के दौरान किसी भी कोचिंग कक्षा का संचालन नहीं किया जा सकेगा। नियमित स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र स्कूल अवधि में कोचिंग सेंटर नहीं जा सकेंगे। इसके अलावा, कोचिंग की अधिकतम अवधि प्रतिदिन 5 घंटे तय की गई है और रविवार को साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य कर दिया गया है ताकि छात्रों को विश्राम मिल सके। 

अंक और रैंक सार्वजनिक करने पर रोक

अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा और छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित होने से बचाने के लिए सरकार ने उनके प्रदर्शन को गोपनीय रखने का फैसला लिया है। कोचिंग संस्थान अब किसी भी छात्र का नाम, अंक या रैंक नोटिस बोर्ड या वेबसाइट पर सार्वजनिक नहीं कर पाएंगे। परीक्षा के परिणाम केवल छात्र और उनके अभिभावकों को निजी तौर पर बताए जाएंगे। साथ ही, कम अंक लाने वाले छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग देना अनिवार्य होगा। 

वेलनेस सेल और मानसिक स्वास्थ्य जांच

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हुए हर कोचिंग संस्थान के लिए 'वेलनेस सेल' स्थापित करना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए संस्थानों को स्थानीय अस्पतालों या मनोवैज्ञानिकों के साथ एमओयू (MoU) करना होगा। प्रवेश लेने के 30 दिनों के भीतर हर छात्र की अनिवार्य रूप से मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाएगी। साथ ही, अभिभावकों के साथ हर महीने 'डी-स्ट्रेस वर्कशॉप' का आयोजन भी करना होगा ताकि घरेलू स्तर पर भी छात्रों का तनाव कम किया जा सके। 

मासिक रिपोर्ट और पारदर्शिता के नियम

कोचिंग संस्थानों को अब जिला स्तरीय निगरानी समिति के ऑनलाइन पोर्टल पर हर महीने 'वेलनेस रिपोर्ट' और साल में एक बार 'मेंटल हेल्थ ऑडिट रिपोर्ट' जमा करनी होगी। इसमें काउंसलिंग सत्रों की संख्या और छात्रों के तनाव के मुख्य कारकों की जानकारी देना आवश्यक होगा। इसके अतिरिक्त, हर संस्थान के लिए एक कार्यशील वेबसाइट अनिवार्य होगी, जिस पर शिक्षकों की योग्यता, उपलब्ध क्षेत्रफल, फीस स्ट्रक्चर, रिफंड पॉलिसी और पिछले तीन वर्षों का वास्तविक सफलता प्रतिशत प्रदर्शित करना होगा। इससे भ्रामक विज्ञापनों और फर्जी दावों पर लगाम लगेगी।