रजौली अस्पताल में पोषण केंद्र की बदहाली उजागर : निरीक्षण में गैस रेगुलेटर तक मिला नदारद, खाद्य आयोग अध्यक्ष ने दिए कड़े निर्देश
नवादा जिले के रजौली अस्पातल में पोषण केन्द्र का हाल बेहाल है। आलम यह है कि कुपोषित बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले रसोईघर में गैस सिलेंडर तक नही है। यह सब राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष के औचक निरीक्षण के दौरान उजागर हुआ है.....
Nawada : बिहार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष प्रहलाद सरकार ने जिले के रजौली अनुमंडलीय अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिससे अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) की बेहद दयनीय और चिंताजनक स्थिति खुलकर सामने आई। केंद्र की लापरवाही का आलम यह था कि कुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार करने वाले रसोईघर से गैस सिलेंडर का रेगुलेटर तक नदारद पाया गया। आयोग के अध्यक्ष के आने की भनक मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में बेड आदि बिछाकर व्यवस्था को दुरुस्त दिखाने की नाकाम कोशिश की, लेकिन वे कमियों को छिपा नहीं सके।
अधिकारियों को कड़ी फटकार और 5 वर्षों का रिकॉर्ड तलब
निरीक्षण के दौरान जब जिम्मेदार अधिकारियों से केंद्र की बदहाली पर पूछताछ की गई, तो उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए अध्यक्ष प्रहलाद सरकार ने प्रभारी डीएस डॉ. दिलीप कुमार और मैनेजर विकास कुमार को कड़ी फटकार लगाई और सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से पिछले पांच वर्षों में एनआरसी में भर्ती हुए सभी कुपोषित बच्चों की पूरी सूची, उनके पारिवारिक विवरण और पहचान/आधार विवरण सहित पूरी रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। इसके साथ ही वर्ष 2026 में अब तक भर्ती हुए बच्चों की संख्या की भी रिपोर्ट मांगी गई है.
कर्मचारियों के असंवेदनशील व्यवहार से लौट रहे मरीज
अस्पताल के निरीक्षण में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया कि कई कुपोषित बच्चों के परिवार अस्पताल में भर्ती होने के अगले ही दिन वापस लौट गए। आयोग के अध्यक्ष ने आशंका जताई कि केंद्र की बदहाल व्यवस्था और वहां के कर्मचारियों के असंवेदनशील व उदासीन व्यवहार के कारण ही पीड़ित परिवार वहां रुकने के बजाय लौटने को मजबूर हुए होंगे। आयोग ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि जल्द ही एक विशेष जांच टीम भेजकर इस पूरे मामले और दोनों पहलुओं की गहन छानबीन कराई जाएगी।
स्थायी उपाधीक्षक की कमी और बंद पड़ा पीकू वार्ड
इस औचक निरीक्षण ने अस्पताल के बुनियादी ढांचे और मैनपावर की कमी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल पिछले पांच वर्षों से बिना किसी स्थायी उपाधीक्षक (Deputy Superintendent) के केवल प्रभारी के भरोसे चल रहा है। एनआरसी में डॉक्टरों, चाइल्ड स्पेशलिस्ट (बाल रोग विशेषज्ञों) और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी पाई गई। इसके अलावा, 14 वर्ष तक के गंभीर बच्चों के इलाज के लिए बना पीकू (PICU) वार्ड हमेशा बंद रहने और सिविल सर्जन के दौरों के महज औपचारिकता तक सीमित रहने के आरोपों पर भी अध्यक्ष ने कड़ा संज्ञान लिया है।
न्यायालय जाने की चेतावनी और सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
खाद्य आयोग के अध्यक्ष प्रहलाद सरकार ने मीडिया और स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों व शिकायतों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि बच्चों के स्वास्थ्य और उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यदि अस्पताल प्रशासन की ओर से सुधार नहीं किया गया, तो बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस मामले को माननीय न्यायालय के समक्ष भी उठाया जाएगा।
अमन सिन्हा की रिपोर्ट