Bihar News : बिहार में औसतन डेढ़ दिन में हो रही किसी न किसी भ्रष्ट लोकसेवक पर कार्रवाई, जनवरी से अब तक दर्ज हुए 80 एफआईआर
Bihar News : बिहार में औसतन हर 1.5 (डेढ़) दिन में किसी न किसी भ्रष्ट लोकसेवक के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। जो पहले 5 से 6 दिन होता था......पढ़िए आगे
PATNA : राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की गति को काफी बढ़ा दी है। वर्तमान में औसतन डेढ़ दिन में एक एफआईआर दर्ज कर किसी न किसी भ्रष्ट लोकसेवक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जबकि, पिछले सात वर्षों के दौरान हुई औसत कार्रवाई पर नजर डालें, तो एफआईआर होने का औसतन इससे 10 से 15 गुणा अधिक था। वर्ष 2018 से 2024 के बीच औसतन 50 मुकदमे प्रतिवर्ष दर्ज किए जाते थे। यानी 4 से 6 दिन में एक एफआईआर दर्ज होती थी।
2025 के 122 एफआईआर
वर्ष 2025 के बाद से कार्रवाई की रफ्तार एकदम से तेज हो गई और इसमें बड़ा बदलाव आया। 2025 में 236 कार्य दिवस में 122 एफआईआर दर्ज की गई। औसतन 1.9 दिन में एक प्राथमिकी भ्रष्टाचार के खिलाफ दर्ज की गई। मौजूदा वर्ष 2026 में जनवरी से अब तक करीब 129 कार्यदिवस में 80 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। औसतन 1.5 (डेढ़) दिन में किसी न किसी भ्रष्ट लोकसेवक के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है। वर्ष समाप्त होने तक यानी आगामी पांच महीने में भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ कार्रवाई के इस आंकड़े में अधिक बढ़ोतरी होने की संभावना है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष भ्रष्टचारियों के खिलाफ कार्रवाई के औसत दिवस में कमी आई है। पिछले वर्ष जहां 1.9 दिन यानी करीब हर दो दिन में किसी न किसी भ्रष्टाचारी के खिलाफ कार्रवाई होती है। इस वर्ष इस आंकड़े में तेजी से कमी दर्ज की गई और यह औसतन डेढ़ दिन तक पहुंच गया है।
यह है इसका प्रमुख कारण
इस मामले में निगरानी ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार का कहना है कि निगरानी के स्तर से तेजी से कार्रवाई होने की मुख्य वजह मामला दर्ज करने से लेकर इसकी पूरी प्रक्रिया बेहद सरल बनाना है। शिकायतें दर्ज करने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। ट्रैप से जुड़े मामलों में प्राप्त शिकायतों का सत्यापन निगरानी ब्यूरो की एक टीम तुरंत करती है और इसके बाद संबंधित पदाधिकारी को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया भी जल्द से जल्द कर ली जाती है।
लोगों ने साक्षा किए अनुभव
शिकायत करने वाले लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह किसी न किसी भ्रष्ट पदाधिकारी से त्रस्त होकर उन्होंने निगरानी ब्यूरो से इसकी शिकायत की और फिर संबंधित पदाधिकारी दबोचे गए। बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के रहने वाले नंदकिशोर प्रसाद ने मुंगेर प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में तैनात पेशकार मुकेश कुमार के खिलाफ शिकायत कर उन्हें घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार करवाया था। उनसे 1.70 लाख रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। अपने अनुभव साझा करते हुए नंदकिशोर प्रसाद ने बताया कि शिकायत करने के महज 5 से 6 दिन में इसका सत्यापन करके कार्रवाई कर दी गई। इससे वे काफी खुश हैं। समस्तीपुर के रोसड़ा थाना क्षेत्र निवासी रामानंद महतो ने पटना स्थित मौलाना मजहरूलहक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के सहायक रजिस्ट्रार सनवलाह खान के खिलाफ 2.50 लाख रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। रामानंद महतो ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शिकायत मिलने के बाद पूरी तत्परता से कार्रवाई की गई है। तुरंत निगरानी ब्यूरो की टीम ने कार्रवाई कर दोषी को घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। पटना जिला के रूपसपुर थाना निवासी कौशल किशोर की शिकायत पर जानीपुर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक संजय कुमार सिंह को 1 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में कौशल किशोर का कहना है कि निगरानी ब्यूरो ने त्वरित कार्रवाई की है और यह बहुत संतोषप्रद रहा। शिकायत के तुरंत बाद कार्रवाई की गई। यह जानीपुर में जमीन माफिया के साथ मिली-भगत के पूरे रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई साबित हुई।