Bihar Politics : Y+ सुरक्षा मिलते ही बदले AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान के सुर, अज़ान की आवाज और मुस्लिम जीवनशैली पर उठाए सवाल
PATNA : बिहार में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष और अमौर विधायक अख्तरुल ईमान अपने एक ताजा बयान को लेकर विवादों के घेरे में आ गए हैं। राज्य सरकार द्वारा Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलने के ठीक दो दिन बाद विधायक ने अज़ान की आवाज और मुस्लिम समुदाय के रहन-सहन के तौर-तरीकों पर टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मस्जिदों से बहुत तेज आवाज में अज़ान देना वर्तमान सामाजिक और मजहबी परिस्थितियों के हिसाब से उचित नहीं है, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
एक चैनल से बातचीत के दौरान अख्तरुल ईमान ने तर्क दिया कि अज़ान का असली मकसद नमाज के वक्त का ऐलान करना और लोगों को मस्जिद तक बुलाना है। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि 500 मीटर के दायरे में रहने वाले लोग मस्जिद आते हैं, लेकिन अज़ान की आवाज 3 किलोमीटर दूर तक जाती है। विधायक के अनुसार, इस तरह ऊंची आवाज में अज़ान देना 'मुनासिब अमल' नहीं है और इसे लेकर उन्होंने मुसलमानों को आत्ममंथन करने की हिदायत भी दी है।
अख्तरुल ईमान ने केवल अज़ान ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज की खान-पान और मजहबी कार्यक्रमों की परंपराओं पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि समुदाय में खाने-पीने और सोने का कोई निश्चित समय नहीं रह गया है। रात के 12 बजे बारात का खाना खाना और देर रात 2 बजे तक मजलिस या जलसे आयोजित करना स्वास्थ्य और अनुशासन के लिहाज से गलत है। उन्होंने आधी रात को होने वाले सार्वजनिक मजहबी कार्यक्रमों पर रोक लगाने की वकालत करते हुए इसे सिस्टम के खिलाफ बताया।
विधायक के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और लोग उनकी तुलना पाकिस्तानी स्कॉलर तारिक मसूद से कर रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे सुधारवादी कदम बताया है, तो वहीं एक बड़ा वर्ग इसे 'राजनीतिक अवसरवाद' करार दे रहा है। आम लोगों का आरोप है कि 28 जनवरी को मिली Y+ सुरक्षा के बाद विधायक की भाषा बदल गई है और वे सत्ता पक्ष को खुश करने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है।