Bihar News : एकेयू कुलसचिव ने विशेष सचिव पर 'हाथ तोड़ने की धमकी' देने का लगाया आरोप, निलंबन की मांग को लेकर प्रशासन व कर्मियों ने दिया धरना

Bihar News : एकेयू के कुलसचिव डॉ. नीरंजन प्रसाद यादव ने समिति के समन्वयक पवन कुमार सिन्हा के खिलाफ कथित अमर्यादित व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

कुलसचिव का आरोप - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (एकेयू), पटना में गठित जांच समिति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति के गठन की प्रक्रिया, उसके अधिकार क्षेत्र और जांच की अवधि को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हुए राज्यपाल सचिवालय को पत्र भेजा है। कुलसचिव डॉ. नीरंजन प्रसाद यादव ने समिति के समन्वयक पवन कुमार सिन्हा के खिलाफ कथित अमर्यादित व्यवहार, आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग और विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों को धमकी दिए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। कुलसचिव द्वारा राज्यपाल सचिवालय को भेजे गए पत्र में दावा किया गया है कि जांच के दौरान पवन कुमार सिन्हा ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ प्रशासनिक एवं संस्थागत मर्यादा के विपरीत व्यवहार किया। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय के कुलसचिव को “हाथ तुड़वाने की धमकी” जैसी कथित धमकीपूर्ण भाषा का सामना करना पड़ा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कथित व्यवहार को गंभीर मामला बताते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

कुलपति ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी भेजी गंभीर शिकायत

मामले को लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को गंभीर शिकायतें भेजी हैं। शिकायतों में जांच समिति के गठन की प्रक्रिया, समिति के कथित अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने, जांच के दौरान विश्वविद्यालय अधिकारियों के साथ कथित अमर्यादित व्यवहार तथा धमकीपूर्ण भाषा के प्रयोग का उल्लेख किया गया है। कुलपति ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मामले का तत्काल संज्ञान लेने, विश्वविद्यालय प्रशासन एवं कर्मचारियों की सुरक्षा और संस्थागत गरिमा सुनिश्चित करने तथा आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध निलंबन सहित कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजी गई शिकायतों के माध्यम से राज्य सरकार के शीर्ष स्तर पर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया है, ताकि मामले में शीघ्र और निष्पक्ष हस्तक्षेप हो सके।

जांच समिति के गठन की वैधता पर सवाल

विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने पत्र में जांच समिति के गठन को लेकर भी गंभीर संवैधानिक एवं प्रशासनिक सवाल उठाए हैं। कुलसचिव का कहना है कि कुलाधिपति/राज्यपाल की अनुमति के बिना विश्वविद्यालय के विरुद्ध जांच समिति गठित करना अधिकार क्षेत्र का विषय है और इसे विश्वविद्यालय ने अवैध गठन के रूप में चुनौती दी है। राज्यपाल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव के स्तर से 27 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय से संबंधित जांच समिति गठित किए जाने का उल्लेख पत्र में किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा को समिति का समन्वयक बनाया गया था, जबकि गृह विभाग, अभियोजन निदेशालय और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। विश्वविद्यालय का कहना है कि समिति के गठन संबंधी आदेश में जांच पूरी करने के लिए 15 दिनों की अवधि निर्धारित की गई थी। कुलसचिव के पत्र के अनुसार, निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद जांच की अवधि बढ़ाए जाने से संबंधित कोई विधिवत आदेश अथवा पत्र विश्वविद्यालय को प्राप्त नहीं हुआ। इसके बावजूद समिति द्वारा जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने आपत्ति जताई है।

12 सितंबर को विश्वविद्यालय पहुंची जांच समिति

कुलसचिव के पत्र के अनुसार, 12 सितंबर को सुबह करीब 11 बजे जांच समिति के सदस्य विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे। समिति की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन से बड़ी संख्या में दस्तावेज और फाइलें उपलब्ध कराने को कहा गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि समिति द्वारा करीब 1,344 पृष्ठों के दस्तावेज मांगे गए, जिन्हें उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने आवश्यक सहयोग किया। विश्वविद्यालय का कहना है कि मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद भी समिति की ओर से लगातार अतिरिक्त फाइलों और अभिलेखों की मांग की जाती रही। इनमें GeM से संबंधित फाइलें और अन्य प्रशासनिक दस्तावेज भी शामिल थे।

पवन कुमार सिन्हा के व्यवहार पर कुलसचिव ने जताई आपत्ति

राज्यपाल सचिवालय को भेजे गए पत्र में कुलसचिव ने आरोप लगाया है कि दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के दौरान समिति के समन्वयक पवन कुमार सिन्हा का विश्वविद्यालय के अधिकारियों के प्रति व्यवहार कथित तौर पर आपत्तिजनक और अमर्यादित रहा। कुलसचिव के अनुसार, अधिकारियों को कथित रूप से धमकीपूर्ण भाषा में संबोधित किया गया तथा बातचीत के दौरान प्रशासनिक गरिमा और संस्थागत मर्यादा का पालन नहीं किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विशेष रूप से कथित “हाथ तुड़वाने की धमकी” को गंभीरता से लेते हुए इसे केवल व्यक्तिगत दुर्व्यवहार नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के पदाधिकारी के सम्मान एवं सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यदि किसी जांच के दौरान किसी अधिकारी के साथ इस प्रकार की भाषा या धमकी का प्रयोग किया जाता है तो यह जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और गरिमा पर भी प्रश्न खड़ा करता है।

निलंबन की मांग को लेकर धरना

घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन एवं कर्मचारियों में नाराजगी की स्थिति बनी हुई है। एकेयू प्रशासन एवं कर्मचारियों की ओर से धरना दिए जाने की बात सामने आई है। धरने पर बैठे कर्मियों की प्रमुख मांग है कि पवन कुमार सिन्हा को तत्काल निलंबित किया जाए तथा उनके विरुद्ध कथित अमर्यादित व्यवहार और धमकी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। विश्वविद्यालय कर्मियों का कहना है कि जांच के नाम पर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के साथ कथित तौर पर अपमानजनक या धमकीपूर्ण व्यवहार स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि जांच प्रक्रिया यदि नियमों के तहत हो रही है तो उसमें सभी पक्षों के सम्मान और संस्थागत मर्यादा का पालन आवश्यक है।

राज्यपाल सचिवालय और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग

कुलसचिव डॉ. नीरंजन प्रसाद यादव ने राज्यपाल सचिवालय से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। वहीं, कुलपति ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजी गई शिकायतों में भी मामले की गंभीरता, जांच समिति की वैधता और कथित धमकीपूर्ण व्यवहार का उल्लेख करते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।पत्रों में जांच समिति के गठन की प्रक्रिया, उसके अधिकार क्षेत्र, निर्धारित जांच अवधि तथा जांच के दौरान कथित व्यवहार की समीक्षा करने का अनुरोध किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध निलंबन सहित नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। विश्वविद्यालय का कहना है कि इस पूरे प्रकरण का असर न केवल विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ा है, बल्कि इससे विश्वविद्यालय तथा राज्य सरकार की संस्थागत छवि भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन ने राज्यपाल सचिवालय के साथ-साथ मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से भी मामले का शीघ्र संज्ञान लेकर उचित निर्णय लेने का अनुरोध किया है। हालांकि, पवन कुमार सिन्हा के विरुद्ध लगाए गए “हाथ तुड़वाने की धमकी”, अमर्यादित भाषा और अधिकारों के कथित दुरुपयोग संबंधी आरोप फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति द्वारा विभिन्न अधिकारियों को भेजी गई शिकायतों में किए गए दावे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा संबंधित अधिकारी का पक्ष इस समाचार ब्रीफ में उपलब्ध नहीं है।