Bihar Politics: रिटायरमेंट की अफवाहों के बीच 16 जनवरी से समृद्धि यात्रा पर निकलेंगे सीएम नीतीश, पश्चिम चंपारण से विपक्ष को देंगे करारा सियासी जवाब

Bihar Politics: बीमारी और उम्र को मुद्दा बनाकर जो सियासी तीर छोड़े गए, उनका जवाब नीतीश कुमार ने लगातार अपने काम और सक्रियता से दिया।...

रिटायरमेंट की अफवाहों के बीच 16 जनवरी से समृद्धि यात्रा पर निकलेंगे सीएम नीतीश- फोटो : reporter

Bihar Politics:  भारतीय जनता पार्टी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बनाएगी, चुनाव जीतने के बाद भी सीएम नहीं बनेंगे, बीमार हैं इसलिए जनता उन्हें दोबारा स्वीकार नहीं करेगी ये तीनों बातें विपक्ष ने विधानसभा के चुनाव में  में पूरे ज़ोर-शोर से फैलाईं। जब यह नैरेटिव ज़मीनी हक़ीक़त से टकराकर बिखर गया, तो 2026 की मियाद जोड़कर नया शिगूफ़ा उछाल दिया गया कि नीतीश कुमार अब रिटायर हो जाएंगे। लेकिन बिहार की सियासत में नीतीश कुमार हर बार की तरह इस बार भी अलग मूड में नज़र आ रहे हैं बयान से नहीं, अमल से जवाब देने के अंदाज़ में।

यह सच है कि मुख्यमंत्री कई बार बीमार पड़े। उम्र भी करीब 74 साल है। मगर बीमारी और उम्र को मुद्दा बनाकर जो सियासी तीर छोड़े गए, उनका जवाब नीतीश कुमार ने लगातार अपने काम और सक्रियता से दिया। जब विपक्ष चुनाव लड़ने के बजाय निर्वाचन आयोग से मोर्चा ले रहा था, तब नीतीश कुमार बिना ध्यान भटकाए जिलों में जाकर समीक्षा कर रहे थे और उसी के मुताबिक कैबिनेट से फ़ैसले ले रहे थे।

चुनाव के दौरान जब मौसम का बहाना बनाकर विपक्षी नेता वर्चुअल मंचों तक सिमट गए, तब नीतीश कुमार हेलीकॉप्टर छोड़कर सड़क मार्ग से सभाएं कर रहे थे। 243 में से 202 सीटें जीतकर 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी उन्होंने आराम नहीं चुना। उस वक़्त जब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अपनी पार्टी के 25 सीटों पर सिमटने के बाद विदेश यात्रा पर निकल गए, नीतीश कुमार ठंड में भी निरीक्षण और बैठकों में जुटे रहे।

मीडिया से दूरी, इंटरव्यू से परहेज़ और म्यूट वीडियो इन सब पर सवाल उठते रहे, लेकिन नीतीश कुमार ने कभी सफ़ाई नहीं दी। वह जानते हैं कि बिहार की सियासत में बोलने से ज़्यादा दिखाने का वज़न है। यही वजह है कि हर साल ठंड में यात्रा उनकी सियासी पहचान बन गई है। समीक्षा यात्रा, जल-जीवन-हरियाली, समाधान, प्रगति और अब जनवरी की कनकनी में समृद्धि यात्रा।

16 जनवरी से पश्चिम चंपारण से शुरू होकर वैशाली तक जाने वाली समृद्धि यात्रा सिर्फ़ योजनाओं की समीक्षा नहीं, बल्कि उस पूरे प्रचार का जवाब है जो उन्हें थका, बीमार और रिटायर बताने की कोशिश करता रहा। बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार एक बार फिर यह जता रहे हैं कि जब तक ज़मीन पर चलने की ताक़त है, तब तक कुर्सी छोड़ने का फ़ैसला अफ़वाहों से नहीं, हक़ीक़त से होगा।