JDU Political Crisis: नीतीश-ललन-निशांत की नाराजगी बाहुबली विधायक पर पड़ी भारी, पढ़िए अनंत सिंह पर एक्शन की इनसाइड स्टोरी
नीतीश-ललन की बैठक के बाद हुआ बाहुबली के बाहर निकालने का फैसला, निशांत की नाराजगी भी बनी वजह!
JDU Political Crisis: बिहार की सियासत में मोकामा के विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से बाहर करने का फैसला अचानक लिया गया कदम नहीं था। 24 अक्टूबर को पार्टी से निष्कासन की कार्रवाई के पीछे कई दिनों से चल रही खींचतान, नेतृत्व की नाराजगी और एमएलसी चुनाव के दौरान हुई बयानबाजी की भूमिका बताई जा रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की। साथ ही, उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी की पार्टी सदस्यता समाप्त किए जाने की भी जानकारी सामने आई। विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की विधायकी समाप्त करने की अनुशंसा किए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, विधानसभा सदस्यता पर अंतिम फैसला संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगा।
15 अक्टूबर को ही तैयार हो गई थी कार्रवाई की जमीन?
जदयू से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई पर विचार पहले ही शुरू हो चुका था। पार्टी नेतृत्व एमएलसी चुनाव के दौरान कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता था, जिससे जन सुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज सिंह को चुनावी फायदा मिल सके। इसी वजह से कार्रवाई के लिए मतदान समाप्त होने तक इंतजार किए जाने की चर्चा है। अनंत सिंह और जदयू नेता नीरज कुमार के बीच विवाद बढ़ने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को सौंपी थी। ललन सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि इस प्रकरण में पार्टी की तरफ से भी गलती हुई है और उन्होंने अनंत सिंह को पार्टी के खिलाफ बयान नहीं देने के लिए समझाया है। लेकिन इसके बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आया।
ललन सिंह पर टिप्पणी से बढ़ा सियासी तनाव
अनंत सिंह लगातार नीरज कुमार के खिलाफ बयान देते रहे और एमएलसी चुनाव में जन सुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार करते रहे। 23 अक्टूबर को उन्होंने ललन सिंह को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वह ललन सिंह को नहीं जानते और बिहार में इस नाम के कई लोग हैं। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि जदयू उनके खिलाफ कार्रवाई करे। इन बयानों को पार्टी नेतृत्व के प्रति खुली चुनौती के तौर पर देखा गया। इसके अगले दिन, 24 अक्टूबर को ललन सिंह के दिल्ली से पटना पहुंचने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ बैठक होने की बात सामने आई। बताया जाता है कि बैठक में अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सहमति बनी।
निशांत कुमार की नाराजगी की भी चर्चा
इस पूरे प्रकरण में निशांत कुमार की भूमिका को लेकर भी सियासी गलियारों में चर्चा है। जदयू से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि अनंत सिंह की कुछ टिप्पणियों से निशांत नाराज थे। अनंत सिंह ने नीरज कुमार के समर्थन में निशांत के प्रचार करने पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें छोटे चुनाव में नहीं जाना चाहिए था, क्योंकि यह पार्टी का चुनाव नहीं था। इसके बाद अनंत सिंह की नीतीश कुमार को लेकर की गई टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा था कि उन्होंने पार्टी के लिए कुर्बानी दी है और नीतीश कुमार के कारण उन पर गोली चली तथा नौ लोगों की हत्या हुई। इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हुई। पार्टी नेतृत्व के लिए यह बयान असहज स्थिति पैदा करने वाला माना गया।
जदयू में अनुशासन और नेतृत्व का सवाल
अनंत सिंह के निष्कासन को जदयू में संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व के फैसलों की अहमियत से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर यह संदेश देने की कोशिश के रूप में भी इसकी व्याख्या हो रही है कि वरिष्ठ नेता या विधायक भी संगठन के आधिकारिक रुख से अलग जाकर लगातार बयानबाजी करेंगे, तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
अब निगाहें विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष होने वाली प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त होती है, तो मोकामा विधानसभा सीट पर उपचुनाव की संभावना पैदा हो सकती है। फिलहाल उनकी विधायकी पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
ब्यूरो रिपोर्ट