Bihar Politics: अनंत सिंह की विधायकी पर लटकी तलवार! JDU की अर्जी पर अब इस दिन तय होगा सियासी भविष्य

Bihar Politics: बिहार की सियासत में मोकामा विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर हलचल तेज हो गई है।...

अनंत सिंह की सदस्यता पर बड़ा सस्पेंस- फोटो : X

Bihar Politics: बिहार की सियासत में मोकामा विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) की ओर से उनकी विधायकी समाप्त करने की मांग उठाए जाने के बाद अब सबकी निगाहें विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के फैसले पर टिकी हैं। सोमवार को इस मामले में दिनभर राजनीतिक गहमागहमी बनी रही। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा विधानसभा पहुंचे और स्पीकर के सामने अनंत सिंह के खिलाफ दस्तावेज पेश करते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की। हालांकि, अनंत सिंह की सदस्यता पर तत्काल कोई फैसला होने की संभावना नहीं है।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार फिलहाल पटना से दिल्ली रवाना हो गए हैं। उनके 28 या 29 अक्टूबर को पटना लौटने की संभावना है। ऐसे में उनके लौटने के बाद ही सदस्यता से जुड़े मामले में अगली प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। यदि अनंत सिंह को 29 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है, तो जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें निर्धारित समय दिया जाएगा। इसके बाद मामले पर विचार और निर्णय लेने में भी वक्त लग सकता है। इसी वजह से उनकी विधायकी पर फैसला दिवाली के बाद आने की संभावना जताई जा रही है।

जेडीयू ने छह साल के लिए पार्टी से निकाला

अनंत सिंह को बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान बागी तेवर अपनाने के बाद जेडीयू ने पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने उन्हें छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखाया। उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी पार्टी से निष्कासित किए जाने की जानकारी सामने आई है।जेडीयू ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भी सौंपा है। पार्टी की ओर से उनके सरकारी आवास को खाली कराने के लिए भी आवेदन दिए जाने की बात कही गई है। इस तरह पार्टी स्तर पर कार्रवाई के बाद अब मामला विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में पहुंच गया है।उमेश कुशवाहा ने 26 अक्टूबर को विधानसभा पहुंचकर कहा कि अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने के लिए 24 अक्टूबर को ही आवेदन दे दिया गया था। उन्होंने बताया कि 26 अक्टूबर को मामले की प्रगति की जानकारी लेने पहुंचे थे। उनके मुताबिक, विधानसभा सचिव की ओर से त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।

बिना जवाब सुने सदस्यता खत्म करना आसान नहीं

अनंत सिंह की विधायकी पर अंतिम निर्णय लेने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। किसी विधायक की सदस्यता समाप्त करने से जुड़े मामले में संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर देना महत्वपूर्ण है। इसके लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है और जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जा सकता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी उल्लेख किया जा रहा है। बालचंद्र एल. जारकीहोली बनाम बी.एस. येदियुरप्पा मामले में 13 मई 2011 के फैसले को नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया के संदर्भ में उद्धृत किया जाता है। हालांकि, इस फैसले की वास्तविक कानूनी प्रयोज्यता अनंत सिंह के मामले के तथ्यों और लागू प्रावधानों के आधार पर ही तय होगी।विधानसभा से जुड़े जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में प्रक्रिया पूरी होने और दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही निर्णय लिया जाना चाहिए। जवाब देने के लिए कितना समय दिया जाएगा और उसके बाद फैसला कब आएगा, यह संबंधित कानूनी प्रावधानों और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

अनंत सिंह के मामले में अब भाजपा की भूमिका अहम

जेडीयू की ओर से पार्टी से निष्कासन और सदस्यता समाप्त करने के लिए आवेदन दिए जाने के बाद अब राजनीतिक नजरें भाजपा पर भी टिक गई हैं। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार भाजपा से हैं और सदस्यता संबंधी आवेदन पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी उन्हीं की है।हालांकि, भाजपा के नेता अब तक इस प्रकरण पर खुलकर बयान देने से बचते रहे हैं और इसे जेडीयू का आंतरिक मामला बताते रहे हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधानसभा अध्यक्ष पटना लौटने के बाद मामले में क्या कदम उठाते हैं।फिलहाल अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। नोटिस, जवाब और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी। ऐसे में तत्काल फैसले की उम्मीद कम है और दिवाली के बाद ही इस मामले में कोई निर्णायक घटनाक्रम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।