पटना में कटावरोधी कार्य में बड़ा खेल: जियो बैग में बालू की जगह भरी जा रही मिट्टी, ग्रामीणों ने वीडियो भेज CM से की शिकायत

Bihar News : पटना के मनेर प्रखंड में गंगा नदी के कटाव को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा कराए जा रहे कटावरोधी कार्य में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने ठेकेदार और निर्माण एजेंसी पर गंभीर अनियमितता के आरोप लगाए है....

पटना में कटावरोधी कार्य में बड़ा खेल- फोटो : सुमित कुमार

Patna : पटना के मनेर प्रखंड में गंगा नदी के कटाव को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा कराए जा रहे कटावरोधी कार्य में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। हल्दी छपरा के बदल टोला से नयका टोला तक लगभग 2 करोड़ की लागत से चल रहे इस फ्लड फाइटिंग प्रोजेक्ट में स्थानीय ग्रामीणों ने ठेकेदार और निर्माण एजेंसी पर गंभीर अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि का बंदरबांट करने के लिए नियमों को ताक पर रखकर काम कराया जा रहा है।


धांधली का अनोखा तरीका: नीचे मिट्टी, ऊपर बालू के बोरे

ग्रामीणों ने मौके पर चल रही इस 'लूट-खसोट' का पर्दाफाश करते हुए बताया कि विभागीय नियमों के मुताबिक फ्लड फाइटिंग के लिए जियो बैग (Geo Bags) में गंगा की बालू भरी जानी चाहिए, ताकि पानी का दबाव झेला जा सके। लेकिन, एजेंसी द्वारा मुनाफे के चक्कर में जियो बैग में चुपके से मिट्टी भरी जा रही है। इस बड़ी धांधली को छिपाने के लिए बकायदा शातिराना तरीका अपनाया जा रहा है; मिट्टी से भरे बैगों को नीचे की परत (लेयर) में दबा दिया जाता है और अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए ऊपर से बालू के बोरे रख दिए जाते हैं।


ग्रामीणों ने साक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री को भेजा वीडियो

इस पूरी गड़बड़ी से आक्रोशित ग्रामीणों ने चुप बैठने के बजाय डिजिटल मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने कार्यस्थल पर हो रहे इस घटिया निर्माण और मिट्टी भरे जाने का पूरा वीडियो और फोटो साक्ष्य के तौर पर रिकॉर्ड कर लिया है। इस धांधली के पुख्ता सबूतों को सिंचाई विभाग के आला अधिकारियों के साथ-साथ सीधे मुख्यमंत्री को भी शिकायत के तौर पर भेजा गया है, ताकि इस मामले में तुरंत उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की जा सके।


शिकायत पर कनीय अभियंता (JE) ने झाड़ा पल्ला

हैरानी की बात यह है कि जब ग्रामीणों ने कार्यस्थल पर मौजूद कनीय अभियंता (JE) से इस घटिया काम को लेकर सीधी शिकायत की, तो उन्होंने जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया। जेई ने ग्रामीणों की बात सुनने के बजाय सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, खगौल जाने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से स्थानीय लोगों में प्रशासन और विभाग के प्रति भारी नाराजगी है।


पहले भी बह चुका है 40 मीटर बांध, मंडराया बाढ़ का खतरा

ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग को चेतावनी देते हुए याद दिलाया कि इससे पहले भी इसी तरह के घटिया और लापरवाही भरे काम के कारण 40 मीटर का बांध नदी के तेज बहाव में बह चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस 'लूट-खसोट' को तुरंत नहीं रोका गया और काम की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो आगामी मानसून में बाढ़ आते ही यह दो करोड़ रुपये की पूरी योजना एक बार फिर से गंगा नदी में विलीन हो जाएगी और इलाके के सैकड़ों घरों पर डूबने का खतरा मंडराने लगेगा।


सुमीत की रिपोर्ट