Bihar BJP: बांकीपुर उपचुनाव में BJP की सियासी अग्निपरीक्षा, नितिन नवीन की प्रतिष्ठा दांव पर, इस इंटरनल रिपोर्ट ने बढ़ाई बेचैनी
Bihar BJP: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब भारतीय जनता पार्टी के लिए सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया है। यह चुनाव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की राजनीतिक प्रतिष्ठा और संगठन की ताकत की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।..
Bihar BJP: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब भारतीय जनता पार्टी के लिए सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया है। यह चुनाव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की राजनीतिक प्रतिष्ठा और संगठन की ताकत की भी बड़ी परीक्षा बन गया है। दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे नितिन नवीन ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा की तो पार्टी की एक इंटरनल रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए।
सूत्रों के मुताबिक, समीक्षा बैठक में सामने आई रिपोर्ट में बताया गया कि पार्टी के कुछ स्थानीय नेता और उपचुनाव के लिए जिम्मेदारी संभाल रहे कई स्टार प्रचारक अभी तक अपेक्षित सक्रियता के साथ मैदान में नहीं उतरे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद नितिन नवीन ने नेताओं की चुनावी भूमिका, क्षेत्र में उनकी सक्रियता और प्रचार अभियान से दूरी की वजह का अलग-अलग ब्योरा मांगा है।
भारतीय जनता पार्टी ने बांकीपुर चुनाव को लेकर बूथ स्तर तक मजबूत रणनीति तैयार की है। पार्टी ने 60 शक्ति केंद्र, 50 से अधिक विधायक-विधान पार्षद और बूथ मैनेजमेंट नेटवर्क के जरिए माइक्रो प्लानिंग तैयार की है। इसके बावजूद टिकट की दौड़ में शामिल रहे और प्रभावशाली माने जाने वाले कुछ चेहरों की सीमित सक्रियता ने संगठन के भीतर चर्चा तेज कर दी है।पटना की मेयर सीता साहू को साहू (तेली) समाज का बड़ा चेहरा माना जाता है। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में इस समाज के मतदाताओं पर उनकी पकड़ को देखते हुए पार्टी को उम्मीद थी कि वह समाज आधारित बैठकों, महिला सम्मेलनों और जनसंपर्क अभियानों के जरिए चुनावी माहौल बनाएंगी। लेकिन प्रचार अभियान शुरू होने के बाद अब तक उनकी कोई बड़ी सार्वजनिक चुनावी गतिविधि सामने नहीं आई है।
न तो बड़े रोड शो में उनकी सक्रिय मौजूदगी दिखी और न ही संगठन की प्रमुख बैठकों में उनकी भागीदारी चर्चा में रही। पार्टी के अंदर इसे सामाजिक समीकरण साधने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, सूत्र इसे स्थानीय राजनीतिक समीकरण और सीमित जिम्मेदारियों से जोड़कर देख रहे हैं। यह भी चर्चा है कि बेटे को टिकट नहीं मिलने से उनकी नाराजगी हो सकती है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी मानती है कि उनकी मौजूदगी शहरी, शिक्षित और पारंपरिक भाजपा मतदाताओं पर असर डाल सकती है। हालांकि, अभी तक उनकी व्यापक जनसंपर्क गतिविधियां सीमित रही हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनाव के अंतिम चरण में उनके कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।BJP ने मतदाताओं को चार श्रेणियों में बांटकर चुनावी रणनीति तैयार की है। A कैटेगरी में पक्के समर्थक, B में पार्टी की ओर झुकाव रखने वाले मतदाता, C में असमंजस वाले वोटर और D में विरोधी मतदाता शामिल हैं। फिलहाल पार्टी का पूरा फोकस C कैटेगरी के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर है।पूरे बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को 10 मंडलों में बांटा गया है। प्रत्येक मंडल में अस्थायी चुनाव कार्यालय बनाए गए हैं। बूथ अध्यक्ष से लेकर मंडल अध्यक्ष तक रोजाना फीडबैक लिया जा रहा है और उसी आधार पर अगले दिन की रणनीति तैयार की जा रही है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन खुद चुनावी तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। ऐसे में बांकीपुर का मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि संगठन की क्षमता, सामाजिक समीकरण और नेतृत्व की साख की भी लड़ाई बन गया है।