Bankipur By Election: बांकीपुर बना सियासी रणक्षेत्र, बीजेपी ने खेला बंटी दांव, पीके की हुंकार और RJD की चुनौती, उपचुनाव में दिलचस्प हुई जंग...

Bankipur By Election: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब पूरी तरह सियासी अखाड़े में तब्दील हो चुका है।

बांकीपुर बना सियासी रणक्षेत्र- फोटो : social Media

Bankipur By Election: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब पूरी तरह सियासी अखाड़े में तब्दील हो चुका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपनी-अपनी बिसात बिछा दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पूर्व विधायक और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर उनके करीबी माने जाने वाले अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी को चुनावी मैदान में उतारकर स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी इस सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखना चाहती है। दूसरी ओर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की प्रत्याशी रेखा गुप्ता ने मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प बना दिया है। 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को चुनावी फैसले का ऐलान होगा।

बीजेपी ने स्थानीय संगठन से जुड़े और लंबे समय से पार्टी के लिए सक्रिय रहे अभिषेक कुमार सिन्हा पर भरोसा जताया है। राजनीतिक गलियारों में उन्हें नितिन नवीन का करीबी माना जाता है। नितिन नवीन लगातार पांच बार इसी सीट से विधायक रहे हैं, ऐसे में पार्टी ने अब उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर अभिषेक को आगे बढ़ाकर संगठन और परंपरागत वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।

बांकीपुर में कायस्थ समुदाय के मतदाता करीब 14 से 15 प्रतिशत बताए जाते हैं और चुनावी समीकरण में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। अभिषेक सिन्हा भी इसी समाज से आते हैं, जिससे बीजेपी को जातीय और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर बढ़त मिलने की उम्मीद है।

उधर, महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने कारोबारी पृष्ठभूमि वाली रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है, जो वैश्य समाज से आती हैं। वहीं जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस सीट को अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया है। उनके चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला और रोचक हो गया है।

इस बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद और पटना साहिब से दो बार सांसद रह चुके शत्रुघ्न सिन्हा ने भी प्रशांत किशोर के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने कहा कि पीके ने चुनावी फिजा में "जबरदस्त हलचल" पैदा कर दी है और जनता से उनके पक्ष में मतदान की अपील की है।

अब बांकीपुर का उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि सियासी साख, जातीय समीकरण, संगठन की ताकत और नए-पुराने राजनीतिक दावेदारों की प्रतिष्ठा की जंग बन चुका है। बिहार की राजनीति की निगाहें अब 30 जुलाई की वोटिंग और 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिक गई हैं।