बेगूसराय की बेटी मोनी कुमारी का जलवा: 'खेलो इंडिया' में लाइव पेंटिंग कर जीता देश का दिल

बेगूसराय की बेटी मोनी कुमारी ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 में अपनी जीवंत मिथिला पेंटिंग से देश को मंत्रमुग्ध कर दिया है। देशभर से आए सैकड़ों कलाकारों के बीच मोनी की तुलिका (ब्रश) ने मिथिला की पारंपरिक संस्कृति को कैनवास पर जीवंत कर दिया

Begusarai - बिहार के बेगूसराय की बेटी मोनी कुमारी ने एक बार फिर अपनी कला का लोहा मनवाते हुए जिले का नाम पूरे देश में रौशन किया है। साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के चौकी गांव की रहने वाली मोनी ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 के उद्घाटन समारोह में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस भव्य समारोह में मोनी को 'लाइव मिथिला कैनवास पेंटिंग' सेगमेंट के लिए चुना गया था। देशभर से आए सैकड़ों कलाकारों के बीच मोनी की तुलिका (ब्रश) ने मिथिला की पारंपरिक संस्कृति को कैनवास पर जीवंत कर दिया, जिसे देख वहां मौजूद हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।

सम्मान और गुरुजनों का मार्गदर्शन

मोनी कुमारी के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रभावित होकर मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी ने उन्हें प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया है। यह उपलब्धि मोनी के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि वह वर्तमान में कला जगत की महान विभूतियों के सानिध्य में शिक्षा ले रही हैं। वह पद्मश्री बौवा देवी, पद्मश्री दुलारी देवी और शिवन पासवान जैसे दिग्गजों से मिथिला पेंटिंग की बारीकियां सीख रही हैं। मोनी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों और संस्थान को देते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें अपनी कला को वैश्विक ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रेरणा देता है।

बचपन का शौक बना सफलता का आधार

मोनी कुमारी की यह सफलता रातों-रात नहीं आई है। चौकी गांव की इस बेटी को बचपन से ही मिथिला पेंटिंग के प्रति गहरा लगाव और रुचि थी। उन्होंने अपनी मेहनत और निरंतर अभ्यास के दम पर पारंपरिक कला को आधुनिक पहचान दिलाने का संकल्प लिया। आज उनकी यही रुचि एक बड़े मुकाम में बदल चुकी है। अपनी जड़ों से जुड़ी रहकर मोनी न केवल मिथिला पेंटिंग का संरक्षण कर रही हैं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक मिसाल भी पेश कर रही हैं। उनका लक्ष्य है कि बिहार की यह प्राचीन कला दुनिया के हर कोने तक पहुंचे।

गांव में जश्न और बधाईयों का तांता

जैसे ही मोनी की इस बड़ी उपलब्धि की खबर उनके पैतृक गांव चौकी पहुँची, वहां खुशी की लहर दौड़ गई। गांव के लोगों में गर्व का माहौल है और लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां मना रहे हैं। मोनी के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मोनी ने साबित कर दिया है कि अगर प्रतिभा और दृढ़ संकल्प हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी राष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है। यह सफलता केवल मोनी की नहीं, बल्कि पूरे बेगूसराय जिले के लिए गौरव का क्षण है।

Report - ajay shastri