महिला कर्मियों से गलत व्यवहार करनेवाले सीएचसी प्रभारी को सिर्फ ट्रांसफर कर सिविल सर्जन ने छोड़ा, कड़ी कार्रवाई की मांग

भागलपुर के इसमाइलपुर PHC प्रभारी डॉ. राकेश रंजन को महिला कर्मियों के शारीरिक-मानसिक शोषण और सरकारी संसाधनों (AC, अलमारी) की चोरी के आरोप में पदमुक्त कर दिया गया है। जानें पूरी रिपोर्ट।

भागलपुर सिविल सर्जन द्वारा डॉ. राकेश रंजन के खिलाफ जारी आधिकारिक निलंबन/तबादला आदेश की प्रति।- फोटो : बाल मुकुंद कुमार

Bhagalpur - भागलपुर जिला प्रशासन में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब सिविल सर्जन ने इसमाइलपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) डॉ. राकेश रंजन को गंभीर आरोपों के चलते पदमुक्त कर दिया। डॉ. राकेश रंजन पर केवल महिला कर्मियों के शारीरिक और मानसिक शोषण का ही नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों को अपने 'बाप की बपौती' समझकर इस्तेमाल करने के शर्मनाक आरोप हैं। सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि डॉ. राकेश रंजन को तत्काल प्रभाव से गोपालपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक साधारण चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में 'साइड लाइन' कर दिया गया है।

कुर्सी पर बैठकर 'गुंडई' का खेल, महिला कर्मियों की अस्मिता पर प्रहार!

दस्तावेज़ों और वायरल हो रही खबरों के अनुसार, डॉ. राकेश रंजन की इसमाइलपुर PHC में 'दबंगई' का यह आलम था कि उन्होंने बायोमेट्रिक्स हाजिरी मशीन को भी अपने निजी कक्ष में रखवा दिया था। इसका उद्देश्य सरकारी काम की पारदर्शिता बढ़ाना नहीं, बल्कि महिला कर्मियों को बार-बार अपने कक्ष में आने पर मजबूर करना था। जिला परिषद अध्यक्ष विपिन कुमार मंडल द्वारा सिविल सर्जन को लिखी गई हिला देने वाली चिट्ठी में गंभीर आरोप लगाया गया है कि "महिला कर्मियों को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा शारीरिक तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।" उन्होंने इस 'कुकृत्य' की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

सरकारी एसी, अलमारी की 'निजी लूट': बेटी के आवास पर भेजा माल!

डॉ. राकेश रंजन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी उतने ही गंभीर हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवंटित संसाधनों का निजी इस्तेमाल किया। आरोपों के अनुसार, उन्होंने भागलपुर से दवा लेकर आने वाले औषधि वाहन का उपयोग कर इसमाइलपुर CHC से दो अलमारियां बरारी स्थित अपनी बेटी के आवास पर भेज दी थीं! यही नहीं, उपकेन्द्र के लिए आवंटित तीन एसी (AC) को भी उन्होंने निजी इस्तेमाल के लिए अपने आवास पर लगवा लिया! जिला परिषद अध्यक्ष की चिट्ठी में सरकारी संसाधनों की इस खुली 'लूट' पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की गई थी।

वायरल वीडियो और जिला परिषद अध्यक्ष की चिट्ठी: जब 'दबाब' बना तो झुका सिस्टम!

बताया जा रहा है कि डॉ. राकेश रंजन के इन कारनामों का एक वीडियो वायरल होने के बाद, जिला परिषद अध्यक्ष विपिन कुमार मंडल ने इस मामले को गंभीरता से लिया और 28 मार्च 2026 को सिविल सर्जन को एक तीखा पत्र लिखकर आरोपी चिकित्सक पर कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने अपनी चिट्ठी में स्पष्ट कहा था कि "चिकित्सा जगत में चिकित्सक को भगवान का रूप माना जाता है, ऐसे में इस प्रकार का आरोप अत्यंत गंभीर है।"

दोषी पर सिर्फ तबादला? अब क्या करेगी स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम?

सिविल सर्जन द्वारा जारी आदेश के बाद, भागलपुर सदर अस्पताल के तत्कालीन MOIC डॉ. बुचकुन दास को इसमाइलपुर PHC का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक तबादला ही इन गंभीर अपराधों की सजा है? महिला कर्मियों के शोषण और सरकारी संपत्ति की लूट के आरोपों पर सिर्फ तबादला करना, क्या न्याय के साथ मज़ाक नहीं है? सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक टीम गठित की है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। लेकिन क्या यह जांच सिर्फ एक 'दिखावा' होगी, या डॉ. राकेश रंजन को उनके पापों की असली सजा मिलेगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

रिपोर्ट - बालमुकुंद कुमार